उपनिषदों में तत्वज्ञान” पर गोष्ठी संपन्न उपनिषदों में जीवन निर्माण के तत्व छिपे हैं- डॉ. रामचन्द्र (कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय)

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नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “उपनिषदों में तत्वज्ञान” विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न हुआ I यह करोना काल से 536 वाँ वेब नार था I
मुख्य वक्ता डॉ. रामचन्द्र (संस्कृत विभागाध्यक्ष, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय)
ने कहा कि उपनिषदों में जीवन निर्माण के वे मूल तत्त्व छिपे हुए हैं जिनके आधार पर अनादि काल से शिष्ट एवं मेधावी मानव का निर्माण होता रहा है।भारतीय ज्ञान परंपरा में मुख्य रूप से ब्रह्म विद्या के लिए उपनिषद शब्द का प्रयोग होता है।वर्तमान समय में 11 प्रमुख उपनिषद् प्राप्त होती हैं इनमें अभ्युदय एवं निश्श्रेयस तथा श्रेय एवं प्रेय मार्ग की बहुत ही संतुलित व्याख्या प्राप्त होती है। इनके अध्ययन से व्यक्ति के क्लेश एवं तनाव पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं तथा उत्साह एवं उमंग के संस्कार जीवन के अभिन्न अंग बन जाते हैं। वस्तुतः उपनिषद हमें बताते हैं कि संसार को केवल बाहर से नहीं देखना है अपितु इसके कण – कण में व्याप्त ईश्वर की उपस्थिति के साथ देखना है। यह दृष्टि व्यक्ति को संसार का स्वामी बनाती है। ईशोपनिषद् में कहा है कि परम सत्य का मुख स्वर्णमय पात्र से ढका हुआ है उसे हटाकर ही परम सत्य को देखा जा सकता है।आज का युवा संसार की प्रत्यक्ष चकाचौंध में ही उलझ जाता है उससे प्राप्त असफलता के कारण युवा पीढ़ी लगातार क्लेश, तनाव एवं निराशा ग्रस्त हो रही है।उपनिषदों का सन्देश लौकिक सत्य एवं ब्रह्म सत्य के संतुलन का है जिसके माध्यम से व्यक्ति पहाड जैसे कष्ट को भी हंसते हुए पार कर लेता है। कठोपनिषद एवं बृहदारण्यक उपनिषद् में नचिकेता एवं मैत्रेयी का कालजयी संवाद प्रत्येक व्यक्ति को अवश्यमेव पढना चाहिए।वहाँ कहा गया है कि केवल सांसारिक पदार्थों की प्राप्ति से सुख प्राप्ति की इच्छा का मार्ग अन्धकार पूर्ण है। केवल मनुष्य में ही नहीं अपितु प्रकृति के प्रत्येक पदार्थ से एकात्मकता की अनुभूति होने पर अपना – पराया का भाव समाप्त होता होता है और व्यक्ति के शोक और मोह समाप्त हो जाते हैं। तैत्तिरीय उपनिषद में वर्णित अन्नमय , प्राणमय,मनोमय,विज्ञानमय एवं आनन्दमय कोश का सम्यक अनुशीलन व्यक्ति को शारीरिक, आध्यात्मिक एवं बौद्धिक रूप से मजबूत बनाता है।इस उपनिषद् में अधिक से अधिक अन्न पैदा करने एवं कभी भी अन्न की निंदा न करने का भी सन्देश दिया गया है। यह उल्लेखनीय है कि नई शिक्षा नीति में उपनिषदों के मूल्यवान संदेश को प्रमुखता से शामिल किया गया है।ऐतिहासिक रूप से आदि शंकराचार्य का भाष्य अत्यन्त महत्वपूर्ण है। स्वामी दयानन्द एवं स्वामी विवेकानन्द ने उपनिषदों के अध्ययन का आह्वान किया है।
मंच का कुशल संचालन परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने किया व
राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
मुख्य अतिथि डॉ.
संतोष अरोड़ा (कानपुर)
एवं आर्य नेता राजेश मेंहदीरत्ता ने भी उक्त विषय पर अपने विचार रखे।
गायिका प्रवीना ठक्कर, कुसुम भण्डारी,नरेश प्रसाद, सुनीता अरोड़ा,रजनी गर्ग,
ईश्वर देवी, कमलेश चांदना,जनक अरोड़ा,
आदि के भजन हुए।












