आपदा प्रबंधन पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का कुमाऊँ विश्वविद्यालय में समापन

नैनीताल, । कुमाऊं विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन-टीचर ट्रेनिंग सेंटर (एमएमटीटीसी) द्वारा विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए आयोजित सात दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ।
10 से 16 सितंबर 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, संस्थागत तैयारी, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), जलवायु परिवर्तन, अग्नि सुरक्षा, खोज एवं बचाव, प्राथमिक उपचार, बेसिक लाइफ सपोर्ट तथा आपदा के बाद पुनर्बहाली सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि एनसीसी ग्रुप नैनीताल के ग्रुप कमांडर कमोडोर रिची रंजन ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत तथा भारतीय सशस्त्र बलों की भूमिका विषय पर प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता, आपदा राहत एवं बचाव कार्यों में भारतीय सशस्त्र बलों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, प्रभावी समन्वय, संसाधनों का उचित उपयोग तथा नागरिक प्रशासन के साथ तालमेल राहत एवं बचाव कार्यों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
निदेशक प्रो दिव्या यू जोशी ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। अग्निशमन उपकरणों के उपयोग, प्राथमिक प्रतिक्रिया, खोज एवं बचाव तथा आपदा की परिस्थितियों में संस्थागत तैयारी से संबंधित व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए।
कोर्स कोऑर्डिनेटर प्रो. लेफ्टिनेंट रीतेश साह ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान आपदा जोखिम न्यूनीकरण, खतरा एवं जोखिम आकलन, मानवीय आपदाएं, जीआईएस आधारित आपदा मानचित्रण, आपदा प्रबंधन अधिनियम, संस्थागत तैयारी योजना, जलवायु परिवर्तन एवं उभरते आपदा जोखिम, सेंडाई फ्रेमवर्क तथा आपदा के बाद बेहतर पुनर्निर्माण जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए गए। इस कार्यक्रम में एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट ट्रेनिंग नवीन सिंह राना, एसडीआरएफ विशेषज्ञों तथा अग्निनिशमन विभाग के अधिकारी व जवानों ने भी प्रशिक्षण प्रदान किया।
कोर्स कोऑर्डिनेटर प्रो. लेफ्टिनेंट रीतेश साह ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को आपदा से पूर्व तैयारी, जोखिम न्यूनीकरण, प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया एवं आपदा-रोधी संस्थागत व्यवस्था विकसित करने के लिए सक्षम बनाना है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले सभी विशेषज्ञों, संबंधित संस्थाओं एवं 10 राज्यो के 50 प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।