अमर शहीद प.रामप्रसाद बिस्मिल के 126 वें जन्मोत्सव पर कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि बिस्मिल का बलिदान युवाओं के लिए सदैव प्रेरणा पुंज रहेगा-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य बिस्मिल क्रांतिकारियों के सिरमौर थे प्रवीण आर्य

गाजियाबाद l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद प. रामप्रसाद बिस्मिल के 126 वें जन्मोत्सव पर ऑनलाइन विचार गोष्ठी
आयोजित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री प्रवीण आर्य
ने कहा कि पं० रामप्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारियों के सिरमौर रहे, उनसे प्रेरणा पाकर अनेकों नोजवान स्वतंत्रता-आंदोलन में कूद पड़े।अशफाक उल्ला ख़ां और बिस्मिल की दोस्ती जगजाहिर थी एक कट्टर आर्य समाजी और एक कट्टर मुस्लिम,लेकिन राष्ट्र की बलिवेदी पर दोनों इकठ्ठे फांसी पर झूल गए इससे बड़ा सामाजिक समरसता का कोई ओर उदाहरण नहीं हो सकता।बिस्मिल ने देश की आजादी के लिए घर,परिवार सब छोड़ कर राष्ट्र के लिए सब कुछ होम कर दिया।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि बिस्मिल के जीवन का कण कण राष्ट्र के लिए समर्पित था,उनका जीवन युवाओं के लिए सदैव प्रेरणा पुंज का कार्य करता रहेगा ।देश का दुर्भाग्य है कि बिस्मिल जैसे क्रांतिकारियों को इतिहास से विस्मृत करने का षडयंत्र किया गया और एक ही परिवार की पूजा अर्चना की गई, “उनकी तुर्बत पे नहीँ एक भी दिया,जिनके खून से जले थे चिरागे वतन।आज महकते हैं मकबरे उनके जिन्होंने बेचे थे शहीदों के कफन”। अनिल आर्य ने जोर देकर कहा कि यदि आजादी की रक्षा करनी है तो नई पीढ़ी को उनके त्याग,समर्पण, बलिदान से परिचित करवाना ही होगा,नोजवानो को बिस्मिल की फांसी से तीन दिन पहले लिखी आत्म कथा अवश्य पढ़नी चाहिये
राष्ट्रीय मंत्री देवेन्द्र भगत ने कहा कि आज के दौर में देश के युवाओं में बिस्मिल जैसे शहीदों का जीवन नयी ऊर्जा भरने का कार्य करेगा।पंडित राम प्रसाद बिस्मिल एक महान् क्रांतिकारी, देशभक्त ही नहीं बल्कि एक उच्च कोटि के लेखक, कवि,शायर व साहित्यकार भी थे।इनकी लिखी हुई समस्त रचनाएँ बहुत ही जोशीली,क्रांतिकारी होती थीं देशभक्ति भावना से ओतप्रोत इस अमर बलिदानी का जन्म 11 जून सन् 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में हुआ था।
सुप्रसिद्ध गायक रजनी गर्ग, रजनी चुग, पिंकी आर्या, जनक अरोड़ा,रवीन्द्र गुप्ता,प्रवीना ठक्कर, के ओजस्वी गीतों ने उत्साह पैदा किया।












