यजुर्वेद के प्रथम मंत्र की व्याख्या” पर गोष्ठी संपन्न आध्यात्मिक भौतिक उन्नति ईश्वर की कृपा पर निर्भर है -अतुल सहगल

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नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में यजुर्वेद के प्रथम मंत्र की व्याख्या पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह करोना काल से 551 वा वेबिनार था।
वैदिक विद्वान् अतुल सहगल ने भूमिका के रूप में हर वेद के प्रथम मन्त्र की बात रखी और यह कहा कि प्रथम मन्त्र उस वेद कि खिड़की या द्वार के समान होता है जो उस वेद का प्रस्तुतिकरण करते हुए उसका दिग्दर्शन कराता है l यजुर्वेद कर्म का अथवा कर्मकांड का वेद है और इसका प्रथम मंत्र भी कर्म के साधन, साधक और सहायक की बात कहता है l साधन भौतिक वस्तुएं और भौतिक जड़ तत्व हैं, साधक मनुष्य है और सहायक परमेश्वर है l उन्होंने मन्त्र में आने वाले विभिन्न शब्दों का शाब्दिक अर्थ प्रस्तुत करते हुए उनका संयुक्त पदार्थ श्रोताओं के सम्मुख रखा l साथ ही बड़े वेद मन्त्र के केंद्रीय भाव पर प्रकाश डाला और कहा कि यह मन्त्र ईश्वर पर केंद्रित है और अनेक प्रार्थनाओं से भरा है l वक्ता ने फिर मन्त्र को सात अंशों में विभक्त करते हुए, एक एक अंश की विस्तार से व्याख्या की और भौतिक एवं व्यवहारिक उदाहरण देते हुए इन अंशों के भाव प्रकट किये l वक्ता ने यह तथ्य सामने रखा कि ईश्वर ही सभी सुखों का प्रदाता है और मनुष्य तो केवल अपनी अल्प बुद्धि और अल्प शक्तियों से छोटे बड़े प्रयास और प्रयत्न ही कर सकता है और करता भी है l परन्तु वह पुरुषार्थ करने के बाद भी अपने लिए स्वयं सुख निश्चित नहीं कर सकता क्योंकि सुख देने की प्रक्रिया ईश्वर द्वारा संचालित होती है l मनुष्य को अपने यज्ञ रूपी कार्यों को सफल बनाने हेतु ईश्वर का सहाय लेना ही पड़ता है l विघ्नकारी शक्तियों को यज्ञ से दूर रखने के लिए ईश्वर को प्रार्थना की जाती है l और यह प्रार्थना अपने मन, इन्द्रियों और बुद्धि को संयुक्त रखने और उनमें सामंजस्य बनाये रखने हेतु भी आवश्यक और अपेक्षित है l परमात्मा हर यज्ञ का केंद्र बिंदु है और यज्ञ में सम्मिलित मनुष्य को यह तथ्य भली भांति समझना चाहिए l यज्ञ को सफलता पूर्वक संपन्न करने वाला ईश्वर ही है l इसलिए अपने जीवन को सफल बनाने के लिए ईश्वर के साथ सामिप्य बनाये रखना महत्वपूर्ण है l
जीवन में भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति स्वयं के पुरुषार्थ और ईश्वर कृपा पर निर्भर है और इस पुरुषार्थ में ईश्वर स्तुति, प्रार्थना और उपासना भी आ जाते हैं l
मुख्य अतिथि अनीता रेलन व अध्यक्ष ओम सपरा ने ईश्वर उपासना पर प्रकाश डाला। परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया व राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
गायिका प्रवीणा ठक्कर, रविंदर गुप्ता, कौशल्या अरोड़ा, ईश्वर देवी, कमला हंस, सरला बजाज, रचना वर्मा, कमलेश चांदना,जनक अरोड़ा आदि के मधुर भजन हुए।












