बाजपुर की चीनी मिल को लीज पर देने का विरोध, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा

नैनीताल l बाजपुर आसवानी को प्राइवेट कंपनी के क्रूर पंजों से बचाने लेकर मिल अंशधारक किसान, मजदूर साथियों के साथ समस्त कार्यकर्ताओं के साथ बाजपुर चीनी मिल प्रशासनिक भवन के गेट पर सम्मिलित हुआ। चीनी मिल की सह इकाई आसवनी को ३० वर्ष की बाजपुर आसवानी को प्राइवेट कंपनी के क्रूर पंजों से बचाने लेकर मिल अंशधारक किसान, मजदूर साथियों के साथ समस्त कार्यकर्ताओं के साथ बाजपुर चीनी मिल प्रशासनिक भवन के गेट पर सम्मिलित हुआ। चीनी मिल की सह इकाई आसवनी को ३० वर्ष की लीज/पीपीपी मोड पर देने के लिए फेडरेशन ने जो विज्ञप्ति जारी की है इसका पुरज़ोर विरोध किया जाएगा निश्चित तौर पर इसमें बहुत बड़ा भ्रष्टाचार और लेन देन की क़वायद की जा रही है।/पीपीपी मोड पर देने के लिए फेडरेशन ने जो विज्ञप्ति जारी की है इसका पुरज़ोर विरोध किया जाएगा निश्चित तौर पर इसमें बहुत बड़ा भ्रष्टाचार और लेन देन की क़वायद की जा रही है। इधर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर कहा है कि उत्तराखण्ड सहकारी चीनी मिल्स संघ लि0, देहरादून दिनांक/Pao/PUR/ 23(20-217 2023-24 दिनांक 26 मई, 2023 का अवलोकन करना चाहें, जिसके द्वारा सहकारी चीनी मिल बाजपुर की सह-इकाई आसवनी बाजपुर को लीज / रेट/ पी०पी०मोड पर संचालित करने हेतु निविदायें आमन्त्रित की गई है। उक्त निविदा में ई-टेण्डर हेतु www.uktenders.gov.in & www.uttarakhandsugars.com का उल्लेख करते हुए 28 मई 2023 से 23 जून 23 का उल्लेख करते हुए 24 जून.2023 को निविदा खोले जाने हेतु निर्देशित किया गया है। उक्त विषय में अवगत कराना है कि यह कि आसवनी बाजपुर (उत्तराखण्ड राज्य में सहकारिता क्षेत्र में स्थापित एक मात्र आसवनी) अपनी स्थापना वर्ष 1976 से ही लगातार लाभप्रद स्थिति में रही है। यह कि उपरोक्त अवधि में आसवनी बाजपुर द्वारा निर्मित देशी एवं विदेशी मदिरा का निर्माण व्यापक स्तर पर होने के कारण भारतीय सेना के साथ ही तत्कालीन उत्तर प्रदेश के कई जिलों में देशी एवं विदेशी मदिरा की बिक्री करने के साथ ही आसवनी से उत्पन्न एल्कोहल उच्च श्रेणी का होने के कारण विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशों में भी निर्यात किया जाता था। 3. यह कि वर्ष 2017 में पयावरण नियन्त्रण बोर्ड द्वारा जी०एल०डी० नहीं होने के कारण आसवनी मे उत्पादन बन्द करा दिया गया। यह कि वर्ष 2017 के पूर्व से ही श्रमिक संगठनों द्वारा आसवनी, बाजपुर में ई०एन०ए० एथनॉल प्लांट लगाने के साथ ही आसवनी का मोडीफिकेशन कराने हेतु बार-बार लिखा गया, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण समय रहते उपरोक्त श्रमिक संगठनों की भोगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण वर्ष 2017 में आसवनी में उत्पादन बन्द हो गया। यह कि श्रमिक संगठनों द्वारा अधोहस्ताक्षरी को प्रेषित माँग पत्र को उचित मानते हुए मेरे द्वारा केबिनेट मन्त्री के पद पर रहते हुए दिनांक 09.03.2019 को मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन को एक अनुरोध पत्र प्रेषित करते हुए आसवनी बाजपुर को पुनः लाभप्रद स्थिति में लाने के लिए एथनॉल एवं ई०एन०ए० के उत्पादन हेतु प्लांट की स्थापना के लिए एन०सी०डी०सी० से ऋण लेकर आसवनी के आधुनिकीकरण हेतु अनुरोध किया गया था। उक्त अनुरोध पत्र पर भी शासन-प्रशासन द्वारा समय रहते कोई निर्णय नहीं लिया जा सका, जिसके कारण बाजपुर चीनी मिल के कर्मचारियों व बाजपुर की जनता को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ के साथ ही गन्ना कृषकों को उनके गन्ना मूल्य भुगतान में मिलने वाली सहायता से भी वंचित होना पड़ रहा है। यह कि यदि समय रहते शासन-प्रशासन द्वारा बाजपुर आसवनी के संचालन के विषय में श्रमिक संगठनों की मांग पर निर्णय लिया गया होता तो कदाचित आज बाजपुर आसवनी की हालत विपुल आर्थिक क्षति झेलने के बाद भी आज ऐसी नहीं होती। यह कि क्षेत्रीय जनता, मिल के कर्मचारीगण एवं क्षेत्र के किसान भाईयों की एक स्वर में उठ रही आवाज को वास्तविकता एवं क्षेत्रीय विकास के लिए उपयुक्त मानते हुए आपसे अनुरोध है कि उत्तराखण्ड सहकारी चीनी मिल्स संघ लि0 देहरादून के पत्रक 390/PUR/23 (20-217 2023-24 दिनांक 26 मई 2023 को तरकाल प्रभाव से निरस्त करने हेतु आदेश निर्गत करने का कष्ट करेंगे। यह कि शासन स्तर से ही बाजपुर आसवनी में एथनॉल एवं ई०एम०ए० प्लांट की स्थापना करते हुए आसवनी का आधुनिकीकरण किया जाये तथा प्रबन्धन एवं संचालन भी पूर्व की भाँति मिल सतर से किया जाये। यह कि बाजपुर श्रमिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा मेरे समक्ष उपरोक्तानुसार दर्शाये गये बिन्दुओं पर वस्तुपरक कार्यवाही करने का कष्ट करें।