आशुकवि विजय गुप्त की 78 वीं जयंती संपन्न शिक्षा और संस्कार समाज का आधार- डॉ. योगानंद शास्त्री (पूर्व अध्यक्ष दिल्ली विधानसभा) गुप्त जी का जीवन समाज को समर्पित रहा-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

नैनीताल l स्वामी विवेकानंद बाल भारती एजूकेशन व चेरीटेबल सोसाइटी के तत्वावधान में आशु कवि, साहित्यकार,लेखक विजय गुप्त जी की 78 वीं जयंती पर स्मृति दिवस का आयोजन आर्य समाज साकेत नई दिल्ली में किया गया।
मुख्य अतिथि दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. योगानंद शास्त्री ने कहा कि विजय गुप्त ने अपना पूरा जीवन पिछड़े निर्धन बच्चों कि सेवा में संस्कार व शिक्षा देने के लिए न्यौछावर कर दिया।वह देखते ही देखते कविता लिख देते थे।उन्होंने कोरोना काल में अपने विधालय की 6 मास की पूरी फीस माफ कर दी,अभावों में रहकर भी वह सदेव कर्तव्य पथ पर डटे रहे।उनका जीवन एक आदर्श जीवन था जो प्रेरणा देता रहेगा।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा है की वह मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे उनकी मधुर मुस्कान किसी को भी एक बार में ही अपना बना लेती थी।कविता पाठ के लिए देशभर में उनका भ्रमण चलता रहता था।
अध्यक्षता करते हुए आर्य रविदेव गुप्ता ने कहा कि विजय गुप्त अद्भूत व्यक्ति थे “हिंद कि चादर गुरू तेगबहादुर ” उनकी विशेष रचना पड़ने योग्य है।कार्यक्रम का कुशल संचालन ऋचा गुप्ता ने करते हुए अपनी स्मृतियों को साँझा किया और आँखें नम कर दीं।
प्रमुख रूप से सुनीता गुप्ता, राजेश मेंदीरता, अंजू मेहरोत्रा, चतर सिंह नागर, रविन्द्र आर्य, हरिचन्द आर्य ,सुरेन्द्र तलवार, प्रकाशवीर शास्त्री,संध्या बजाज, कृष्ण लाल राणा, अंकुर आर्य, शैलेश आर्य, विजय सबरवाल, उषा चांदना ,गीता झा आदि उपस्थित थे।












