युवाओं को मिली क्रिटिकल और क्रिएटिव थिंकिंग की सलाह

देहरादून l यूथ कैम्प के तीसरे दिन की शुरुआत पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ हुई .बेहतर ढंग से देखने, सुनने, लिखने, सोचने और उसे अभिनय, शब्दों, फोटोग्राफी सहित तमाम रचनात्मक तरह से अभियक्त करने के तरीकों को सीखने, समझने के लिए देहरादून के युवाओं के साथ तीसरे दिन के यूथ कैम्प का आगाज भी पहले की ही भांति अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन तरला आमवाला परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल में दो स्लॉट्स में हुआ .
यूथ कैम्प के तीसरे दिन दून विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉ.अजीत पंवार के निर्देशन में पहले स्लॉट थियेटर वर्कशॉप में युवाओं ने विभिन्न प्रकार के भावों को शारीरिक भंगिमाओं द्वारा प्रस्तुत करते हुए अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया . डॉ.पंवार ने युवाओं के साथ काम करते हुए उनकी अभिनय प्रतिभा को निखारने के लिए शारीरिक संतुलन की गतिविधियों अपनी एड़ी और पंजे पर घूमना ,कुर्सी का सहारा लेकर संतुलन और आगे बढ़ने जैसी गतिविधियाँ कराई . उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों ‘हिंसा परमो धर्मः’तथा ‘दूध का दाम’पर प्रतिभागियों को अपने -अपने तय दायरे में रोल के अनुसार डायलाग बोलने और अभिनय करने के अवसर दिए तथा आवश्यकतानुसार सुधार के सुझाव भी दिए .दूसरे स्लॉट में फाउंडेशन के सदस्य रबीन्द्र जीना एवं जगमोहन कठैत ने क्रिटिकल एवं क्रिएटिव थिंकिग के बारे में युवा प्रतिभागियों से सशक्त एवं सार्थक संवाद किया . प्रतिभागियों से संवाद करते हुए जहाँ दोनों संदर्भदाताओं ने क्रिटिकल एवं क्रिएटिव थिंकिग पर क्या और क्यों जैसे प्रश्नों के माध्यम से इसकी स्पष्ट समझ बनाने की कोशिश की वहीँ सदन में प्रश्नों के माध्यम से इसकी प्रक्रिया और प्रासंगिकता को भी सामने रखा .रबीन्द्र जीना ने कहा कि आज की दुनिया में विविध प्रकार की सूचनाओं और विज्ञापनों का दौर है .सच्चाई तक पहुँचने के लिए क्रिटिकल थिंकिंग बहुत जरूरी है . किसी निर्णय तक पहुँचने के लिए दुनिया के इस विशाल फलक पर विभिन्न माध्यमों से आ रही सूचनाओं का विश्लेषण करने ,तर्क की कसौटी पर कसने की जरूरत है .इसी क्रम में संवाद को विचार की गहराई तक ले जाते हुए जगमोहन कठैत ने कहा कि कि एक अच्छी दुनिया के निर्माण के लिए कदम बढ़ाने की पहली शर्त ही क्रिएटिव थिंकिग है .उन्होंने क्रिएटिव एवं क्रिटिकल थिंकिग को और स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर कोई घर बनाना है तो वह कैसा हो ,उसमें क्या -क्या हो यह पक्ष क्रिएटिव थिंकिग का हिस्सा है किन्तु यह घर क्यों हो ?,ऐसा ही क्यों हो जैसे प्रश्न हमें क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाते हैं .यह सत्र प्रतिभागी युवाओं को आज की दुनिया में सोचने ,समझने तथा तर्क एवं विश्लेषण के द्वारा उनकी रचनात्मक प्रतिभा के उपयोग को दिशा देने की दृष्टि से सार्थक रहा .
अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सदस्य नीतेश खंतवाल ने बताया कि यूथ कैम्प में प्रतिदिन सायं 3 से 5 बजे तक प्रथम स्लॉट में थियेटर वर्कशॉप जारी रहेगा . थियेटर वर्कशॉप के बाद हर दिन 5 से 7 बजे तक दूसरे स्लॉट में युवाओं को विविध विषय विशेषज्ञों से काफी कुछ सीखने को मिलेगा.21 जून को प्रदेश के जाने -माने साइंस एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्त्ता विजय भट्ट के साथ युवा अपने शहर देहरादून को कुछ अलग नज़र और नजरिये से जानेंगे. आगे प्रभावी संवाद कौशल पर फाउंडेशन के सदस्य हिमानी और नीतेश प्रतिभागियों से बातचीत करेंगे . प्रतिभा कटियार से युवा सीखेंगे लिखने के कौशल लेखन कार्यशाला में और अंतिम दिन यानी 24 जून को आर.जे. देवांगना युवाओं से साझा करेंगी अपनी अबतक की यात्रा के बारे में खट्टे -मीठे अनुभव . 18 जून को प्रारम्भ हुआ यह यूथ कैम्प 24 जून तक विविध रोचक गतिविधियों के साथ जारी रहेगा .इस समय जनपद के सैकड़ों युवा प्रतिभाग कर कैम्प की रोचक गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं . आमंत्रित विशेषज्ञों के अलावा फाउंडेशन के सदस्य अर्चना थपलियाल ,प्रदीप डिमरी ,मंजीत सिंह ,गणेश बिष्ट एवं अशोक मिश्र आदि कैम्प को सफल बनाने में जुटे हुए हैं .
इस यूथ कैम्प में देहरादून शहर के 18 से 30 वर्ष के युवा शामिल हो रहे हैं. इस कैम्प में प्रतिभागिता निशुल्क है.












