यूथ कैम्प ‘युवाओं ने लेखन कौशल पर बनायीं समझ’


देहरादून l यूथ कैम्प के छठवें दिन की शुरुआत प्रतिदिन की तरह हर्ष और उत्साह के साथ हुई, बेहतर ढंग से देखने, सुनने, लिखने, सोचने और उसे अभिनय, शब्दों, फोटोग्राफी सहित तमाम रचनात्मक तरह से अभियक्त करने के तरीकों को सीखने, समझने के लिए देहरादून के युवाओं के साथ पांचवें दिन के यूथ कैम्प का आगाज भी पहले की ही भांति अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन तरला आमवाला परिसर में एक खुशनुमा माहौल में हुआ, यूथ कैम्प के छठवें दिन दून विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉ. अजीत पंवार के निर्देशन में पहले स्लॉट थियेटर वर्कशॉप में युवाओं ने दो टोलियाँ बनायीं जिसमें मुंशी प्रेमचंद की दोनों कहानियों ‘हिंसा परमो धर्मः’तथा ‘दूध का दाम’ की अलग-अलग समूहों में पहले की तैयारियों के आधार पर प्रस्तुति दी, दोनों कहानियों के सूत्रधारों और पात्रों ने कहानी के दृश्यों की प्रस्तुति में अपनी भूमिका को सार्थक करने के लिए आज काफी तैयारियां की, आज दोनों समूहों ने एक -दूसरे को अभिनय और दृश्यों के अनुरूप तैयारी को बेहतर करने के लिए फीडबैक भी दिए . डॉ.पंवार ने आज एक बार फिर सभी प्रति भागियों को पूरे स्टेज के बेहतर उपयोग तथा वेश-भूषा तथा पात्रों और परिस्थितियों से उचित तालमेल पर उचित सुझाव दिए . डॉ.पंवार ने युवाओं से अभिनय के लिए अपने संवाद अदायगी के साथ -साथ सही टाइमिंग का ध्यान रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, दूसरे स्लॉट में फाउंडेशन की सदस्य प्रतिभा कटियार ने लेखन कार्यशाला में आये युवाओं से लिखने के कौशल पर सार्थक बातचीत की, इस सत्र में ख़ास तौर से लेखन क्या है और लेखन में आने वाली चुनौतियाँ कौन – कौन और किस प्रकार की होती हैं इस पर गंभीर विमर्श किया .सत्र सहज संवाद और प्रश्न-उत्तर के सहारे जिस प्रकार क्रमशः आगे बढ़ता रहा उसी क्रम में लिखने की गतिविधि भी साथ-साथ चलती रही, संदर्भदाता ने प्रतिभागियों को लिखने के लिए उत्साहित करते हुए गलतियाँ करने से न डरने को कहा, उन्होंने प्रतिभागियों से लोग क्या कहेंगे? कहाँ से शुरुआत करें? सही शब्दों का चयन कैसे करें? जैसे झिझक या संकोच वाले विचारों को लिखने की प्राथमिक मुश्किलें बताते हुए इनकी परवाह न करने की सलाह भी दी, प्रतिभागियों ने जहाँ सत्र में बातचीत के दौरान लेखन कौशल के तत्वों को समझा वहीं इस संवाद से उन्हें स्वयं को कुछ अलग नजरिये से देखने का भी अवसर मिला, लेखन कौशल के सत्र में फाउंडेशन की सदस्य विशाखा का योगदान महत्वपूर्ण रहा . सहज संवाद और प्रक्रिया की दृष्टि से आज के दोनों सत्र प्रभावी रहे.
अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन की नितेश खंतवाल ने बताया कि यूथ कैम्प के अंतिम दिन 24 जून को थियेटर वर्कशॉप के प्रतिभागी डॉ.अजित पंवार के निर्देशन में मुंशी प्रेमचंद की दोनों कहानियों पर अपनी प्रस्तुति देंगे तथा आर. जे. देवांगना युवाओं से अपनी अबतक की यात्रा के बारे में खट्टे-मीठे अनुभव साझा करेंगी, 18 जून को प्रारम्भ हुआ यह यूथ कैम्प 24 जून तक विविध रोचक गतिविधियों के साथ जारी रहेगा, इस समय जनपद के सैकड़ों युवा प्रतिभाग कर कैम्प की रोचक गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं, आमंत्रित विशेषज्ञों के अलावा फाउंडेशन के सदस्य अर्चना थपलियाल, प्रदीप डिमरी, मंजीत सिंह, गणेश बिष्ट, शिखा नयन एवं अशोक मिश्र आदि कैम्प को सफल बनाने में जुटे हुए हैं, इस यूथ कैम्प में देहरादून शहर के 18 से 30 वर्ष के युवा शामिल हो रहे हैं, इस कैम्प में प्रतिभागिता निशुल्क है.