18 से 24 जून- यूथ कैम्प ‘ युवाओं ने सीखी प्रभावी संचार की कला ’

देहरादून l. यूथ कैम्प के पांचवें दिन की शुरुआत प्रतिदिन की तरह हर्ष और उत्साह के साथ हुई .बेहतर ढंग से देखने, सुनने, लिखने, सोचने और उसे अभिनय, शब्दों, फोटोग्राफी सहित तमाम रचनात्मक तरह से अभियक्त करने के तरीकों को सीखने, समझने के लिए देहरादून के युवाओं के साथ पांचवें दिन के यूथ कैम्प का आगाज भी पहले की ही भांति अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन तरला आमवाला परिसर में एक खुशनुमा माहौल में हुआ .
यूथ कैम्प के पांचवें दिन दून विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉ.अजीत पंवार के निर्देशन में पहले स्लॉट थियेटर वर्कशॉप में युवाओं ने जहाँ मुंशी प्रेमचंद की दोनों कहानियों ‘हिंसा परमो धर्मः’तथा ‘दूध का दाम’ के अलग -अलग दृश्यों पर अपनी तैयारी परखने के लिए एकल एवं छोटे समूहों में प्रस्तुति दी वहीं डॉ.पंवार ने पूरे रंगमंच के स्थान के बेहतर उपयोग तथा वेश -भूषा का पात्रों और परिस्थितियों से उचित तालमेल पर भी बात की . डॉ.पंवार ने युवाओं से अलग -अलग दृश्यों का एक -दूसरे से तर्कसंगत ढंग से जुड़ाव होने तथा कहानी के देशकाल के अनुरूप ही भाषा और वेश भूषा के चयन को महत्वपूर्ण बताया .उन्होंने प्रतिभागियों को सफल प्रस्तुति की दृष्टि से अभिनय और मंच की तैयारी से जुड़े सभी आवश्यक पक्षों की तैयारी कर लेने की सलाह देते हुए कहा कि जहाँ भी आवश्यक लगे बदलाव कर सकते हैं . दूसरे स्लॉट में फाउंडेशन के सदस्य नितेश खंतवाल एवं हिमानी लोहानी ने प्रतिभागियों से ‘आर्ट ऑफ इफेक्टिव कम्युनिकेशन’ पर सार्थक संवाद किया. प्रतिभागियों से प्रभावी संचार पर संवाद करते हुए जहाँ दोनों संदर्भदाताओं ने दो समूहों में परिचय की गतिविधि कराते हुए अपने भावों और विचारों को तार्किक एवं क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत करने कीआवश्यकता को उजागर किया वहीं सफल और प्रभावी संचार के लिए कहने या बोलने से अधिक धैर्यपूर्वक सुनने को महत्वपूर्ण बताया .उन्होंने कहा कि प्रभावी संचार के लिए केवल बोलना या कहना ही नहीं बल्कि वेश -भूषा और शारीरिक हाव -भाव को भी उचित और संतुलित रखते हुए संवाद करने की जरूरत है .प्रतिभागियों ने जहाँ सत्र में बातचीत के दौरान सफल संचार के तत्वों को समझा वहीं इस संवाद से उन्हें स्वयं और अपने आसपास को भी कुछ अलग नजरिये से देखने का अवसर मिला.प्रक्रिया और विषय वस्तु की दृष्टि से आज के दोनों सत्र प्रभावी संचार को समर्पित रहे.
अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन की सदस्य हिमानी ने बताया कि यूथ कैम्प में प्रतिदिन सायं 3 से 5 बजे तक प्रथम स्लॉट में थियेटर वर्कशॉप जारी रहेगा . थियेटर वर्कशॉप के बाद हर दिन 5 से 7 बजे तक दूसरे स्लॉट में युवाओं को विविध विषय विशेषज्ञों से काफी कुछ सीखने को मिलेगा..आगे 23 जून को फाउंडेशन की सदस्य प्रतिभा कटियार से लेखन कार्यशाला में आये युवा लिखने के कौशल सीखेंगे और अंतिम दिन यानी 24 जून को आर.जे. देवांगना युवाओं से अपनी अबतक की यात्रा के बारे में खट्टे -मीठे अनुभव साझा करेंगी. 18 जून को प्रारम्भ हुआ यह यूथ कैम्प 24 जून तक विविध रोचक गतिविधियों के साथ जारी रहेगा .इस समय जनपद के सैकड़ों युवा प्रतिभाग कर कैम्प की रोचक गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं . आमंत्रित विशेषज्ञों के अलावा फाउंडेशन के सदस्य अर्चना थपलियाल ,प्रदीप डिमरी ,मंजीत सिंह ,गणेश बिष्ट,शिखा नयन एवं अशोक मिश्र आदि कैम्प को सफल बनाने में जुटे हुए हैं .
इस यूथ कैम्प में देहरादून शहर के 18 से 30 वर्ष के युवा शामिल हो रहे हैं. इस कैम्प में प्रतिभागिता निशुल्क है.












