एरीज ने की गामारे विस्फोट की बड़ी खोज

नैनीताल: एरीज ने उच्च ऊर्जा प्रकाश वाले जीआरबी किलोनोवा विस्फोट की खोज की है। इस खोज को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे आकाशगंगाओं में होने वाले गामा रे विस्फोट की उत्पत्ति को समझने में मदद मिलेगी। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वैज्ञानिक शशिभूषण पांडेय के नेतृत्व में एरीज के शोध छात्र राहुल गुप्ता, अमर आर्यन, अमित कुमार व डा कुंतल मिश्रा शामिल थे। इस घटना को देख वैज्ञानिक आश्चर्यचकित हैं। दरअसल ब्रह्माण्ड में भयानक विस्फोटक घटनाएं होती हैं। जिनके बारे में हमारे वैज्ञानिक आज भी अधिक नही जान पाए हैं। ऐसी ही एक घटना गामा रे विस्फोट हैं। इस खगोलीय घटना में दो विशाल तारों के बीच जबर्दस्त टक्कर होती है और फिर वह दोनो एक दूसरे के समा जाते हैं , यानी उनका आपस में विलय हो जाता है। इनके आपस में टकराने से जबरदस्त विस्फोट होता है और तेज रोशनी के साथ उच्च ऊर्जा उत्पन्न होती है। ऐसे विस्फोटों में चन्द सेकंड में इतनी ऊर्जा निकलती है, जो हमारे सूर्य के जीवनभर की ऊर्जा से भी कहीं अधिक होती है। जिसे देख पाने में एरीज की 3.6 मीटर( डॉट) ऑप्टिकल दूरबीन की बड़ी भूमिका रही है। इसके अलावा अंतरिक्ष की हबल दूरबीन कलर ऑल्टो ओब्जर्वटरी के अलावा कई अन्य पृथ्वी में स्थापित दूरबीनों का सहारा लिया गया। जिसमें एरीज की 3.6 मीटर व्यास की दूरबीन के साथ 4k4k सीसीडी इमेजर की बड़ी भूमिका रही। जिसने ऐसे सटीक आंकड़े जुटाए , जिससे इस खोज में बड़ी मदद मिल पाई। डा शशिभूषण पांडेय ने बताया कि यह विस्फोट पृथ्वी से एक अरब प्रकाश वर्ष दूर हुआ। जिसे एरीज की डॉट, हबल, कलर ऑल्टो ओब्जर्वटरी के अलावा कई अन्य जमीनी दूरबीनों का सहारा लिया गया। डा पांडेय का कहना है कि इस घटना से खोज की दिशा में नई संभावनाओं को बल मिलता है, वहीं जीआरबी जैसी घटनाओं को हमारी समझ के लिए भी चुनौती है। यह घटना पृथ्वी से नजदीक की थी। जिस कारण इस घटना में एक किलोवार के मंद प्रकाश को देख सके। इससे भी दूर इस तरह की घटनाएं होती होंगी, जिन्हे हम देख नहीं सकते। नजदीक यानी एक अरब प्रकाश वर्ष दूर होने के कारण जमीन की दूरबीनों से यह खोज हो सकी। इस अप्रत्याशित खोज में एरीज डा शशिभूषण पांडेय के साथ राहुल गुप्ता, अमर आर्यन, अमित कुमार व डा कुंतल मिश्रा शामिल रहे। इस शोध का नेतृत्व रोम विश्व विद्यालय के डा एलोनोरा ट्रोजा ने किया। एरीज की डॉट दूरबीन से प्राप्त डेटा की सराहना की है। नेचर पत्रिका में प्रकाशित हो गया है। एरीज के निदेशक प्रो दीपांकर बनर्जी ने कहा कि इसमें दोराय नही कि एरीज निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है और इस खोज से देश को खगोल विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी दी है।










