उपनल कर्मचारियों के अनुबंध में देरी पर सरकार सख्त, एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश, 6 अगस्त को हाईकोर्ट में जबाव देना है सरकार को
नैनीताल । उत्तराखंड में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों में आउटसोर्स पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। उत्तराखंड शासन के सचिव युगल किशोर पन्त द्वारा राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को एक कड़ा दिशा-निर्देश जारी किया गया है। शासन ने विभिन्न विभागों में उपनल के माध्यम से कार्ययोजित कर्मचारियों के संबंध में अनुबंध की कार्रवाई को समय से संपादित न किए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है और इसे ‘अत्यंत खेदजनक’ बताया है। शासन ने साफ किया है कि उच्च न्यायालय, नैनीताल द्वारा जनहित याचिका संख्या-116/2018 (कुन्दन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य) में दिए गए आदेशों का हर हाल में पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
शासन द्वारा जारी पत्र के अनुसार, उपनल के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों को उनके पद के सापेक्ष न्यूनतम मानदेय के साथ-साथ महंगाई भत्ता प्रदान करने के लिए कार्मिक और मूल नियोक्ता विभाग के मध्य एक अनुबंध की कार्रवाई की जानी थी। कुछ विभागों ने तो इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया है, लेकिन कई विभागों में अभी तक अनुबंध की यह अनिवार्य कार्रवाई शुरू या संपादित नहीं की गई है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि उच्च न्यायालय के आदेशों का समयबद्ध अनुपालन नहीं किया गया और भविष्य में कोई विपरीत आदेश पारित होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित लापरवाही बरतने वाले विभाग की होगी।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिव युगल किशोर पन्त ने सभी अधीनस्थ विभागों को इसे ‘शीर्ष प्राथमिकता’ देने का निर्देश दिया है। उन्होंने आदेश दिया है कि उपनल के माध्यम से नियुक्त कर्मियों के अनुबंध संबंधी सभी मामलों का नियमानुसार तत्काल परीक्षण किया जाए और हर हाल में एक सप्ताह के भीतर यह कार्रवाई पूरी कर ली जाए। साथ ही, सभी विभागों को एक निश्चित प्रारूप में अनुबंधित कार्मिकों और शेष बचे कार्मिकों का पूरा डेटा तैयार कर शासन तथा उपनल के प्रबंध निदेशक को अनिवार्य रूप से भेजने के लिए कहा गया है ताकि शासन स्तर पर इसकी सटीक समीक्षा की जा सके।










