माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर जन्म: १९ फ़रवरी १९०६ मृत्यु: ५ जून १९७३ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक “”डॉ हेडगेवार”” के प्रति सम्पूर्ण समर्पण भाव और प्रबल आत्मसंयम होने के कारण से 1939 में माधव सदाशिव गोलवलकर को संघ का सरकार्यवाह नियुक्त किया गया। 1940 में डॉ हेडगेवार का ज्वर बढ़ता ही गया और अपना अन्त समय जानकर उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं के सामने माधव को अपने पास बुलाया और कहा “”अब आप ही संघ का कार्य सम्भालें””। 21 जून 1940 को हेडगेवार अनन्त में विलीन हो गए।
सन् 1924 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रवेश के साथ हुआ। सन् 1926 में उन्होंने बी.एससी. और सन् 1928 में एम.एससी. की परीक्षायें भी प्राणिविज्ञान विषय में प्रथम श्रेणी के साथ उत्तीर्ण कीं। इस तरह उनका विद्यार्थी जीवन अत्यन्त यशस्वी रहा।
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से उन्हें निदर्शक (demonstrator) पद पर सेवा करने का प्रस्ताव मिला। 16 अगस्त सन् 1931 को श्री गुरूजी ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राणि-शास्त्र विभाग में निदर्शक का पद संभाल लिया।
सबसे पहले “”डॉ॰ हेडगेवार”” के द्वारा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय भेजे गए नागपुर के स्वयंसेवक भैयाजी दाणी के द्वारा श्री गुरूजी संघ के सम्पर्क में आये और उस शाखा के संघचालक भी बने। 1937 में वो नागपुर वापस आ गए।
नागपुर में श्री गुरूजी के जीवन में एक दम नए मोड़ का आरम्भ हो गया। “”डॉ हेडगेवार”” के सानिध्य में उन्होंने एक अत्यन्त प्रेरणादायक राष्ट्र समर्पित व्यक्तित्व को देखा। किसी आप्त व्यक्ति के द्वारा इस विषय पर पूछने पर उन्होंने कहा-
“मेरा रुझान राष्ट्र संगठन कार्य की और प्रारम्भ से है। यह कार्य संघ में रहकर अधिक परिणामकारिता से मैं कर सकूँगा, ऐसा मेरा विश्वास है। इसलिए मैंने संघ-कार्य में ही स्वयं को समर्पित कर दिया। मुझे लगता है स्वामी विवेकानन्द के तत्वज्ञान और कार्यपद्धति से मेरा यह आचरण सर्वथा सुसंगत है।”
1938 के पश्चात संघ कार्य को ही उन्होंने अपना जीवन कार्य मान लिया। डॉ हेडगेवार के साथ निरन्तर रहते हुवे अपना सारा ध्यान संघ कार्य पर ही केंद्रित किया।











