डिजिटल युग में हिंदी को सक्षम बनाने की आवश्यकता

नैनीताल, । हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, डी.एस.बी. परिसर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल में हिंदी दिवस के अवसर पर “डिजिटल युग में हिंदी के विविध अनुप्रयोग” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन शिवानी शर्मा ने किया तथा संयोजन डॉ. शशि पांडे ने किया।
कार्यक्रम में विषय पर विचार रखते हुए हिमांशु विश्वकर्मा ने कहा कि आज हिंदी के सामने यह प्रश्न नहीं है कि वह डिजिटल दुनिया में आएगी या नहीं, बल्कि यह है कि डिजिटल युग में हिंदी भविष्य की ज्ञान और तकनीक की भाषा किस प्रकार बने। उन्होंने हिंदी में AI के प्रयोग तथा रचनात्मकता को बढ़ाने और समझने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। रोहित रौतेला ने मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदी के बढ़ते प्रयोग की चर्चा करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यम ने पाठक को निर्माता और उपभोक्ता को सहभागी बनने का अवसर दिया है। देवेंद्र ने हिंदी के डिजिटलीकरण में अनुवाद की भूमिका पर अपने विचार रखे। हिमांशु तथा खुशबू, बी.ए. प्रथम सेमेस्टर ने कविता-पाठ प्रस्तुत किया। हिमांशु महरा ने हिंदी के डिजिटल प्रयोग और बदलते भाषाई परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए, जिससे कार्यक्रम में अकादमिक चर्चा के साथ रचनात्मकता का भी समावेश हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. प्रीति आर्या ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में हिंदी दिवस को केवल औपचारिक आयोजन न मानकर हिंदी के प्रति अपनी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के रूप में मनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ऑनलाइन लेखन मंचों तथा लोक-संस्कृति के डिजिटल दस्तावेजीकरण को हिंदी के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विस्तार की महत्वपूर्ण संभावनाएँ बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम ने लेखक और पाठक के बीच सीधा संवाद संभव किया है, लेकिन डिजिटल हिंदी के सामने गुणवत्ता और विश्वसनीयता बड़ी चुनौती हैं। हिंदी को केवल मनोरंजन और सामग्री उपभोग की भाषा न बनाकर विज्ञान, तकनीक, शोध और ज्ञान-निर्माण की भाषा बनाना होगा।
कार्यक्रम में डॉ. कंचन आर्या, डॉ. दीक्षा मेहरा, शोधार्थी धीरज, पल्लवी, पूजा भट्ट, राखी सहित एम.ए. एवं बी.ए. के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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