सुर्भित कर्म सुर्भित वाणी हो सुर्भित अंतरमन” पर गोष्ठी संपन्न गुलाब की तरह हमारा जीवन अंदर बाहर से सुंदर हो -अनिता रेलन

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नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “सुर्भित कर्म,सुर्भित वाणी सुर्भित अंतर्मन” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह करोना काल से 485 वा वेबिनार था।
मुख्य वक्ता अनिता रेलन (आर्थिक सलाहकार, केनरा बैंक दिल्ली) ने कहा कि
जीवन एक रहस्य है हम इसके रहस्य को बिना समझे अपने जीवन की किसी भी साधना में सफलता प्राप्त नहीं कर सकते और जीवन को वैसे भी किसी भी शब्दों में बांधा नहीं जा सकता संसार अनंत है इस अनंत जगत में मनुष्य का जीवन एक नन्ही बूंद सा है बूंद को दो भागों में विभाजित किया जा सकता अंतरंग और बहिरंग दोनों को मिलाकर ही विचार और आचार बनते हैं उन्होंने जीवन को चार पुष्पों के माध्यम से समझाया पहला पुष्प बाहर आकार एवं रंग रूप की दृष्टि से देखने में सुंदर लगते हैं किंतु सौरभ से रहित होते हैं जैसे टेसू के फूल वैसे ही कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं बाह्य ऐश्वर्य शारीरिक सौंदर्य आदि से संपन्न है परंतु सद्गुणों सौरभ से ना के बराबर रावण दुर्योधन जरासंध इन सब के उदाहरण देते हुए उन्होंने दूसरे प्रकार के पुष्प के बारे में बताया जिसमें सौरभ तो है नहीं है सुंदर ना होने पर भी आकर्षित करते हैं विजय चंपा के पुष्प सौरभ के कारण उनका जीवन अनुकरणीय है तीसरे प्रकार के पुष्प बाहर के रूप रंग की दृष्टि से भी सुंदर है अंदर की दृष्टि से भी सुंदर है सौरभ से भी महक रहे उनके जीवन का महत्व है वह है गुलाब का पुष्प जो दूर-दूर तक सुगंधी फैलाता है और उसका रंग रूप भी सुंदर है हमें भी गुलाब के फूल की तरह अंदर और बाहर से दोनों तरीके से सुंदरता को अपनाना है चतुर्थ प्रकार के पुष्प हैं जिनमें ना तो सुंदर है ना ही सुगंध केवल नाम मात्र के फूल जैसे धतूरे के फूल ऐसे ही संसार में लाखों-करोड़ों व्यक्ति हैं जिनमें ना तो शारीरिक सौंदर्य आत्मिक गुणों की सौरभ है बाहर में इंसान का आकार तो है परंतु सही अर्थों में इंसान नहीं है हैवान है क्योंकि बाय एवं अभ्यंतर सौंदर्य से शून्य है उनका जीवन इसलिए उनके जीवन का कोई महत्व नहीं है उन्होंने जीवन को सफल बनाने का सूत्र बताया कि हमारा अंतर्मन थी सुरभीत होना चाहिए कर्म भी सुरभि तो हमारी वाणी भी सुरभि तू गुलाब की तरह हमारा अंदर और बाहर का उदय मुखी सुंदर है विकसित होगा तब कभी निराशा को स्पर्श नहीं करेगी चंपा के पुष्प की तरह अंदर भी सौरभ से परिपूर्ण होगा तो आप निर्भय एवं निबंध भाव से ऊपर और ऊपर उठते चले जाएंगे ऐसे में एक और पुष्प जो चलते-चलते याद आया
यह संसार एक झील है जिसमें विषय वासना का कीचड़ भरा है मोह का जल तरंगित हो रहा है राग द्वेष घृणा आवेश विरोध आदि विकारों के तूफानों से उद्वेलित हैं फिर भी प्रभु हमारे विषय वासना के कीचड़ से भरे हुए विशाल संसार सागर में जन्म लेकर भी कमल के समान निर्लिप्त है आपने कभी ध्यान दिया होगा कमल सदैव जल से निर्लिप्त रहता है कमल में पानी जितना भी पढ़े और उस पर एक बूंद भी नहीं रहती धरती पर पानी है तो जमीन गीली हो जाती है वस्त्र पर पड़े तो गीला हो जाता है जल में कमल की तरह संसार से निर्लिप्त रहकर जीवन यात्रा करें
मेरी यही मंगल कामना है कि मानवता की डाली पर चंपा कमल और गुलाब का एक ऐसा अलबेला फूल लगाए जो अपने लिए औरों के लिए आनंददायक हो।
मुख्य अतिथि आर्य नेत्री वंदना शर्मा व संध्या पाण्डेय ने कहा कि हमारे जीवन से आस पड़ोस में सुगंध आनी चाहिए।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि व्यक्ति के व्यवहार से ही सब रिश्ते बनते व बिगड़ते है। राष्ट्रीय मंत्री प्रवीन आर्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
गायिका कौशल्या अरोड़ा, कमला हंस, जनक अरोड़ा, प्रतिभा कटारिया, सरला बजाज, कामलेश चांदना, ईश्वर देवी,आशा चड्डा, कुसुम भंडारी, डा.सुदेश चुग,ललिता धवन आदि के मधुर भजन हुए।
प्रवीन आर्य
मीडिया प्रभारी
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