अजीम जी प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा कबीर संध्या का आयोजन किया गया

नैनीताल l ‘तू कहता कागद की देखी, मैं कहता आंखन की देखी, मैं कहता सुरझावन हारि तू राख्यो उरझाई रे.’ जीवन की सादगी और सरलता में भरोसा करने वाले कबीर के इस भजन के साथ अरुण गोयल और उनकी टीम ने ‘कहत कबीर’ नामक शाम का आगाज़ किया. अवसर था अज़ीम प्रेमजी फाउन्डेशन के प्रांगण में कबीर संध्या का. आज के इस दौर में जब हमें जाति, धर्म, लिंग और वर्ग भेद की दीवारों को गिराने की और एक मनुष्य के रूप में दूसरे मनुष्य के प्रति संवेदनशील, सहिष्णु होने की और ज्यादा जरूरत है कबीर और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं.
कबीर कौन हैं. धार्मिक आडम्बरों पर चोट करने वाले, कुरीतियों पर आघात करते हैं. कबीर को एक बार में समूचा समझ पाना आसान नहीं है लेकिन ठीक इसके उलट कबीर को समझना कोई मुश्किल भी नहीं. कबीर जहाँ एक तरफ दुनिया भर के विश्व विद्यालयों में पढ़ाये जाते हैं, उन पर न जाने कितने शोध होते हैं, न जाने कितनी किताबें लिखी गयी हैं वहीं दूसरी ओर ‘मसि कागद छुओ नहीं कलम गही नहीं हाथ’ के विचार से आने वाले कबीर बड़ी सरलता के साथ जन मानस के जीवन में घुल जाते हैं. अपनी सरलता के चलते वो आम जन की रोज की बोलचाल में, जीवन शैली में समाये हुए हैं.
कबीर सुनते ही सबसे पहला विचार मन में क्या आता है इस सवाल को जब ऑडियंस से पूछा गया तो शिक्षक, छात्रों समेत सभी ने यही कहा, ‘कबीर धर्म, जाति आदि के भेदभाव को तोड़ने की बात करने वाले व्यक्ति हैं.’
लोक में कबीर इस कदर व्याप्त हैं कि उनके जादुई असर से कोई अछूता रहे यह मुमकिन ही नहीं ‘कहत कबीर’ नाम से सजी इस कबीरी सी शाम को सजाया मन मस्त हुआ फिर क्या बोले, जहाँ देखूं वहां तू ही तू, मत कर माया का अहंकार, मन लागो मेरो यार फकीरी में सहित कबीर के ढेर सारे भजन सुनाये.
इस कार्यक्रम का उद्देश्य कबीर के भावों को सुनने और समझने के लिए किया गया. ताकि हम कबीर की जीवन शैली को समझना हुए उसके विचारों पर चिन्तन कर सकें कि हम अपने जीवन में कहाँ कबीर को देखते समझते हैं. और इस बात पर गौर कर सकें कि कबीर की मूल बातों को अपनाकर हम अपने जीवन में कहाँ कहाँ सरलता ला सकते हैं.
अपने कबीर से प्रेम के सफर के बारे में बताते हुए मालवा से आये अरुण गोयल कहते हैं कि मालवा में कण कण कबीर है. ऐसे ही बचपन में खेलते खेलते कबीर साथ हो लिए. बस तबसे यह सफर देश और दुनिया तक चले जा रहा है.
कार्यक्रम में मालवा मध्य प्रदेश से कबीरपंथी के सुप्रसिद्ध भजन गायक अरुण कुमार गोयल जी के साथ ढोलक पर साथ दिया दीपक नीमा ने, हारमोनियम पर बलराम राठौर, बेंगो पर मनोज धुडावत, मंजीरे पर रमाकांत गोयल ने. कार्यक्रम में शहर के संस्कृतिकर्मी, शिक्षा से जुड़े लोग, युवा आदि शामिल हुए. सभी ने इस कबीरी शाम का आनन्द उठाया.
कार्यक्रम को एक सूत्र में पिरोया प्रतिभा भरद्वाज, एवं जगमोहन कठैत और प्रतिभा कटियार ने इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता तथा शैल कला एवं ग्रामीण विकास समिति के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी एस चंद्रा फाउंडेशन के अनूप बडोला, अशोक कुमार मिश्रा, मीनाक्षी पंत एवं अन्य सहयोगी गण उपस्थित रहे.

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