18 से 24 जून- यूथ कैम्प ‘ युवाओं ने जाना अपना देहरादून ’

देहरादून l यूथ कैम्प के चौथे दिन की शुरुआत हर्ष और उत्साह के साथ हुई .बेहतर ढंग से देखने, सुनने, लिखने, सोचने और उसे अभिनय, शब्दों, फोटोग्राफी सहित तमाम रचनात्मक तरह से अभियक्त करने के तरीकों को सीखने, समझने के लिए देहरादून के युवाओं के साथ चौथे दिन के यूथ कैम्प का आगाज भी पहले की ही भांति अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन तरला आमवाला परिसर में खुशनुमा माहौल में दो स्लॉट्स में हुआ .
यूथ कैम्प के चौथे दिन दून विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉ.अजीत पंवार के निर्देशन में पहले स्लॉट थियेटर वर्कशॉप में युवाओं ने विभिन्न प्रकार के भावों को शारीरिक भंगिमाओं द्वारा प्रस्तुत करते हुए अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया . डॉ.पंवार ने युवाओं के साथ काम करते हुए इस सत्र में उनकी अभिनय प्रतिभा को निखारने के लिए विशेष रूप से रंगमंच के उपयोग की बारीकियां सिखाईं .इस क्रम में रंगमंच के पार्श्व ,मध्य ,दाहिने ,बांये आदि पूरे नौ भागों से परिचय कराते हुए पात्र के रंगमंच प्रवेश ,संवाद कथन और रंगमंच से गमन तक के विविध क्रियाकलापों को करने में रंगमंच के स्थान का उपयोग कैसे करना है इसपर बात की तथा आवश्यक होने पर स्वयं भी करके दिखाया .सुखद बात यह है कि इतने कम समय में अब प्रतिभागी रंगमंच के अनुकूल व्यवहार को सीखने के साथ कुशलता पूर्वक प्रदर्शित भी करने लगे हैं . दूसरे स्लॉट में प्रदेश के जाने -माने साइंस एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्त्ता विजय भट्ट के साथ फाउंडेशन के सदस्य वर्तुल के सवाल -जवाब से सत्र काफी रोचक रहा. इस बातचीत के क्रम में सत्रहवीं शताब्दी में में गुरू रामराय द्वारा आकर यहाँ डेरा डालने से शुरू हुई देहरादून के स्थापना की कहानी सवालों के रास्ते आगे बढ़ी. देहरादून की बस्तियों के बसने की रोचक कथायात्रा 19 वीं सदी के गोरखा युद्ध तथा टिहरी नरेश प्रद्युम्न शाह के वीरगति प्राप्त होने से आगे बढ़कर वहां भी पहुंची जहाँ 1815 ई . में सहारनपुर कमिश्नरी के अंग के रूप में देहरादून भी शेष उत्तर भारत की तरह अंग्रेजी साम्राज्य का हिस्सा बना .वर्तमान देहरादून को समझने की यह शब्द यात्रा जहाँ काफी रोचक रही वहीँ इस सत्र से युवाओं को अपने शहर देहरादून को कुछ अलग नज़र और नजरिये से देखने का अवसर भी मिला.
अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सदस्य नितेश खंतवाल ने बताया कि यूथ कैम्प में प्रतिदिन सायं 3 से 5 बजे तक प्रथम स्लॉट में थियेटर वर्कशॉप जारी रहेगा . थियेटर वर्कशॉप के बाद हर दिन 5 से 7 बजे तक दूसरे स्लॉट में युवाओं को विविध विषय विशेषज्ञों से काफी कुछ सीखने को मिलेगा.22 जून को प्रभावी संवाद कौशल पर फाउंडेशन के सदस्य हिमानी और नितेश प्रतिभागियों से बातचीत करेंगे .आगे के दिनों में फाउंडेशन की सदस्य प्रतिभा कटियार से लेखन कार्यशाला में युवा लिखने के कौशल सीखेंगे और अंतिम दिन यानी 24 जून को आर.जे. देवांगना युवाओं से साझा करेंगी अपनी अबतक की यात्रा के बारे में खट्टे -मीठे अनुभव . 18 जून को प्रारम्भ हुआ यह यूथ कैम्प 24 जून तक विविध रोचक गतिविधियों के साथ जारी रहेगा .इस समय जनपद के सैकड़ों युवा प्रतिभाग कर कैम्प की रोचक गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं . आमंत्रित विशेषज्ञों के अलावा फाउंडेशन के सदस्य अर्चना थपलियाल ,प्रदीप डिमरी ,मंजीत सिंह ,गणेश बिष्ट एवं अशोक मिश्र आदि कैम्प को सफल बनाने में जुटे हुए हैं .
इस यूथ कैम्प में देहरादून शहर के 18 से 30 वर्ष के युवा शामिल हो रहे हैं. इस कैम्प में प्रतिभागिता निशुल्क है.












