सत्य घटनाओं पर बनी है फिल्म ‘हनुमान अंश’, बाबा नीम करौली के भतीजे ने सुनाई जीवनी

नैनीताल संवाददाता। बाबा नीम करौली महाराज की जीवनी पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ पूरी तरह सत्य घटनाओं पर आधारित है। शनिवार को नैनीताल के विजय कुमार के साथ नैनीताल भ्रमण में आए बाबा नीम करौली महराज के भतीजे शैलेंद्र कुमार शर्मा ने बाबा के जीवन से जुड़े अनछुए पहलुओं को साझा किया।
शैलेंद्र शर्मा ने बताया कि बाबा का बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण था। दुर्गा प्रसाद के पुत्र लक्ष्मी नारायण का जन्म फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर में हुआ था। 11 वर्ष की उम्र में माता का निधन हो गया, 12 वर्ष में विवाह हुआ और 13 वर्ष में पिता की दूसरी शादी के बाद वह घर छोड़कर निकल गए।
घर से निकलने के बाद वह राजस्थान और फिर गुजरात पहुंचे, जहां तपस्या की और ‘तलैया बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्हें रहने के लिए मठ दिया गया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। वहां से वह नीम करौली पहुंचे, गुफा खुदवाकर तपस्या की, तभी से उनका नाम नीम करौली पड़ा।
पिता को पता चलने पर वह घर लौट आए। बाद में उनके तीन बच्चे अनेक सिंह शर्मा, धर्म नारायण शर्मा और गिरिजा शर्मा का जन्म हुआ। इसके बाद बाबा ने नैनीताल के हनुमानगढ़ी, भूमियाधार, काकड़ीघाट होते हुए कैंची धाम में 20 वर्षों तक निवास किया। यह धाम आज विश्व प्रसिद्ध है। इसके बाद बाबा मथुरा-वृंदावन परिक्रमा मार्ग, महरौली, लखनऊ के गोमती तट स्थित हनुमान सेतु और कानपुर के पनकी में आश्रम स्थापित किए। वृंदावन में एक मृत घोषित सेठ को जीवनदान देने की घटना के बाद सेठ ने वहां हनुमान मंदिर का निर्माण कराया।
अंत समय में 1973 में वृंदावन से एंबुलेंस से दिल्ली ले जाते समय रास्ते में हृदय गति रुकने से बाबा ने देह त्याग दी। 1973 के बाद नीम करौली और उनकी जन्मभूमि अकबरपुर में आश्रम बने, जो आज पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध हैं।