विभिन्न संगठनों ने नैनीताल में किया धरना प्रदर्शन

नैनीताल l विभिन्न जन संगठनों ने प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था जगदीश व अंकिता हत्याकांड मामले में न्याय दिलाने , हेलग चमोली गढवाल में घस्यारी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले कर्मचारियों / अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने , एवं जन समस्याओं को लेकर विभिन्न जन संगठनों द्वारा एक ज्ञापन अपार आयुक्त को सौंपा गया । प्रदर्शन में उत्तराखंड महिला मंच, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी , इन्कलाबी मजदूर केन्द्र , समाजवादी लोकमंच , प्रगतिशील महिला एकता केंद्र , महिला एकता मंच, उत्तराखंड छात्र संगठन, पछास , क्रन्तिकारी लोक अधिकार संगठन ,उत्तराखंड वन पंचायत संघर्ष मोर्चा , हेलंग एक जुटता मंच शामिल हुए l. अपार आयुक्त को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि
अल्मोड़ा के सल्ट में उत्तराखंडपार्टी के युवा नेता जगदीश की अंतरजातीय विवाह के कारण 01 सितंबर को नृशंस हत्या कर दी गई किंतु राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते आपने, क्षेत्रीय सांसद एवं विधायक ने इस जघन्य हत्याकांड के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोले तथा मृतक जगदीश की पत्नी और परिवार को संबल देने हेतु किसी प्रकार की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी भी नहीं दी गई. जातिवादी मानसिकता से ग्रस्त होकर की गई इस जघन्य हत्या के विचारण के लिए फास्टट्रैक कोर्ट का गठन नहीं किया गया. यह सरकार की संविधान, दलित और वंचित वर्ग के प्रति उपेक्षा और दुर्भावना का परिचायक है.
इसी प्रकार अंकिता हत्याकांड में संलिप्त वीवीआइपी के नाम छुपाए जा रहे हैं, साक्ष्यों को नष्ट किया जा रहा है. क्षेत्रीय विधायक द्वारा ऊपरी शह के चलते साक्ष्य छुपाने की नियत से घटना स्थल पर जेसीबी चला कर तोड़फोड़ कर साक्ष्य नष्ट कर अपराधियों को बचाया जा रहा है. सरकारी एजेंसियों का ध्यान हत्याकांड का पर्दाफाश करने के बजाय अंकिता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे और पीड़ित परिवार को मदद कर रहे आंदोलनरत व्यक्तियों, संगठनों को दबाने, कुचलने की ओर अधिक लगा है.
हेलंग प्रकरण पर कार्पोरेट के हित में सरकार, शासन, स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा उत्तराखंड की महिलाओं की अस्मिता के साथ खिलवाड़, उन्हें जलील, बेइज्जत करने, स्थानीय नागरिकों को उनके वन अधिकार से वंचित करने का कुत्सित प्रयास भी किया जा रहा है. जनभावना और इंसाफ़ की उपेक्षा कर घटना में संलिप्त अधिकारियों को दंडित करने के बजाय संरक्षण दिया जा रहा है.
शासन और प्रशासन स्तर पर भू माफियाओं बड़े कारपोरेट और पूंजीपतियों को उनके प्रभाव में आकर अवैधानिक तरीके से तमाम तरह की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं और आम जनमानस के हितों की निरंतर अवहेलना की जा रही है. इसी प्रकार राज्य में घटित विभिन्न अपराधों में लिप्त सत्ताधारी दल के सदस्यों को जांच में लीपापोती कर बचाया जा रहा है, जिससे आम जनमानस का न्याय पाने का सपना बिखर गया है और वह उत्पीड़न और अत्याचार का शिकार हो रहा है. उत्तराखंड के समस्त जनपक्षीय संगठन तथा नागरिक सरकार की दलित विरोधी, महिला विरोधी, स्थानीय जनविरोधी मानसिकता की और अपराधियों को संरक्षण प्रदान करने की नीतियों की घोर निंदा करती है और मांग करती है कि जगदीश के परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान की जाए उसकी  पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए, मुकदमे को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए ताकि दोषियों को शीघ्र कड़ा दंड दिया जा सके और समाज में बढ़ती सवर्ण मानसिकता और हिंसक पृवृत्ति पर रोक लगाई जा सके. इसी प्रकार अंकिता हत्याकांड की जांच भी निष्पक्ष और त्वरित की जाए तथा सभी दोषियों के नाम उजागर करते हुए मुकदमे की कार्रवाई की जाए हेलन प्रकरण में भू माफियाओं को दे दी गई जमीनों से तुरंत कब्जे हटाकर ग्राम वासियों को उनके हक हकूक बहाल किए जाएं.
राज्य में लगातार कानून व्यवस्था की बिगड़ रही है हालिया घटित विभिन्न हत्याकांड और अन्य आपराधिक घटनाओं, जिनमें विवेचना में लापरवाही बरती जा रही है और दोषियों को सरकारी संरक्षण प्राप्त हो रहा है, ऐसी सभी घटनाओं को लेकर  जनता में गंभीर रोष है.
राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है. नौकरियों में घोटाले किये जा रहे हैं. विधानसभा भर्तियों, यूकेएसएसएससी, सहकारिता और अन्य तमाम भर्तियां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं. शिक्षित बेरोजगार युवाओं के नौकरी पाने के सपने बिखर रहे हैं उत्तराखंड के समस्त जनपक्षीय पार्टियों का स्पष्ट मानना है कि राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार और नौकरियों की लूट पर सरकार सामिल है. भ्रष्ट मंत्रियों, नेताओं, अधिकारियों और दलालों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है.
राज्य के पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों और अभयारण्यों के निकटवर्ती क्षेत्रों में हिंसक जंगली जानवरों का आतंक फैला हुआ है. आए दिन निर्दोष नागरिक जंगली जानवरों के हमले का शिकार हो रहे हैं, जान से हाथ धो रहे हैं. आवारा पशु, सुवर, बंदर, लंगूर कृषकों के लिए बुरा सपना बन चुके हैं. ग्रामीण कृषि और आर्थिकी तबाह बर्बाद हो रही है. राज्य में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है. आम आदमी हताश और निराश है.
कमरतोड़ महंगाई और लगातार बढती बेरोजगारी से राज्य की जनता तंग व त्रस्त है.
दूसरी ओर राज्य सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए, राज्य की जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने के लिए और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और वैमनस्य फैलाने की बुरी नीयत से समान नागरिक कानून का सिगूफा उछाल रही है, जिसका न तो ड्राफ्ट सार्वजनिक किया गया है, न सरकार की मंशा स्पस्ट हो पा रही है कि वह इस दिशा में वास्तव में क्या चाहती है?
पार्टी मांग करती है कि सरकार जनता से सुझाव मांगने का नाटक करने के बजाय सर्वप्रथम ड्राफ्ट सार्वजनिक करे, तत्पश्चात जनता, राजनीति दलो और कानून विशेषज्ञों से मंतब्य मांगे. यदि इस दिशा में आवश्यक कदम नहीं उठाए जाते हैं, तथा अपराधों पर अंकुश लगाने और आम जनमानस को सुरक्षा और इंसाफ दिलाने हेतु राज्य सरकार द्वारा गंभीर कदम नहीं उठाए गये तो सरकार की कार्पोरेट परस्त, दलित, विरोधी,जनविरोधी नीतियों और राज्य की जनता के साथ किये जा रहे छल के खिलाफ उत्तराखंड के समस्त संघर्षरत जन संगठन एकजुट होकर व्यापक जनआंदोलन करेंगे | ज्ञापन में प्रभात ध्यानी राजीव लोचन साह शीला रजवार उमा भट्ट चिंतामणि डॉ महेंद्र पाल दिनेश उपाध्याय आदि के हस्ताक्षर थे l

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