जोशीमठ नगर को बचाने हेतु जोशीमठ त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाये।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने उत्तराखण्ड के सीमांत पर बसे ऐतिहासिक-सांस्कृतिक-पर्यटक नगर जोशीमठ के अस्तित्व के लिये और अपने जीवन व भविष्य के प्रति आशंकित लोगों का संघर्ष जारी है । एनटीपीसी और सरकार का बार-बार कहना है कि परियोजना की सुरंग जोशीमठ से दूर है । हमारा सवाल है कि बाईपास सुरंग कहां है ? उसकी स्थिति जोशीमठ के नीचे ही है और वह विस्फोटों के जरिये ही बनी है । लोगों को आशंका है कि उसमें कुछ दिन पहले तक लगातार विस्फोट किये जा रहे थे जो जोशीमठ में आज हो रहे भू धंसाव का मुख्य कारण हैं । शेष कारणों ने इस प्रक्रिया को तीव्र करने में योगदान किया है ।
अब जब जोशीमठ के अधिकांश घरों में दरारें आ चुकी हैं और कुछ भूगर्भ वैज्ञानिकों ने भी जनता की ही तरह, बड़ी आपदा की आशंका व्यक्त की है, तब अपना जीवन, सम्पत्ति व भविष्य की सुरक्षा की चिंता ने जनता को पुनः सड़कों पर ला दिया है । यदि सरकार व प्रशासन समय रहते जनता की सुन लेते और कार्यवाही करते तो यह नौबत नहीं आती ।
हमारे द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष रखे गए प्रमुख बिंदु :
1.जोशीमठ नगर को बचाने हेतु जोशीमठ त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाये।
2.एनटीपीसी की परियोजना पर पूर्ण रोक की प्रक्रिया प्रारंभ हो
3. हेलंग-मारवाड़ी बाईपास पूर्णतया बन्द हो ।
4.एनटीपीसी को पूर्व में हुए 2010 के समझौते को लागू करने को कहा जाय, जिससे घर-मकानों का बीमा करने की बात प्रमुख है ।
5.जोशीमठ के समयबद्ध विस्थापन, पुनर्वास एवं स्थायीकरण के लिये,जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति को शामिल करते हुए एक अधिकार प्राप्त उच्च स्तरीय कमेटी का गठन हो ।
6.जोशीमठ में पीड़ितों की तत्काल आवास भोजन व अन्य सहायता हेतु एक समन्वय समिति बने जिसमें स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जाय । लोगों के घर मकानों का आंकलन करते हुए मुआवजा व उनके स्थाई पुनर्वास की प्रक्रिया तुरन्त प्रारंभ की जाए ।
राज्य सरकार इस आपदा की घड़ी में विशाल ह्रदय से ,मानवीय दृष्टिकोण से पीड़ित जनता के हित मे सबको साथ लेकर चलते हुए कार्य करे । हमारा मानना है कि सिर्फ प्रशासनिक मशीनरी के भरोसे, इस बड़ी आपदा से नहीं निपटा जा सकता । पूर्व की आपदाओं का भी यही सबक है । मुख्य विपक्षी दल के नाते हम कंधे से कंधा मिलाकर चलने और सहयोग करने का प्रस्ताव पुनः दोहराते हैं । इस नगर के व इसके निवासियों के भविष्य के मद्देनजर उत्तराखंड सरकार शीघ्र कार्यवाही करे l











