लोहड़ी व मकर संक्रांति का वैज्ञानिक स्वरूप” पर गोष्ठी संपन्न, भारत पर्व व परंपराओं से समृद्ध है -अतुल सहगल

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केंद्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्त्वावधान में “लोहड़ी व मकर संक्रांति का वैज्ञानिक स्वरूप” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह कोरोना काल से 489 वहां वेबिनार था।
वैदिक प्रवक्ता अतुल सहगल ने कहा कि भारत पर्व और परंपराओं का समृद्ध भंडार है। इस देश की परंपराएं वैज्ञानिक तथ्यों और सिद्धांतों पर टिकी हैं क्योंकि इस देश की विचारधारा के मूल स्रोत ईश्वर प्रदत्त वेद ग्रन्थ हैं और हर वेद मन्त्र एक वैज्ञानिक तथ्य और उस पर आधारित सन्देश प्रस्तुत करता है।पर्व इसी समृद्ध परंपरा के अंग हैं और हर पर्व या उत्सव का वैज्ञानिक आधार व महत्त्व है।वक्ता ने वर्तमान वर्ष में मकर संक्रांति की काल अवधि की चर्चा करते हुए इसका ऋतु क्रम से सम्बन्ध बताया।नदियों में स्नान और तिल, गुड़ के सेवन की प्रथा के पीछे का वेज्ञानिक उल्लेख किया।शिशिर ऋतु में चन्द्रमा की शक्ति बढ़ती है जिसका अनुकूल प्रभाव मनुष्य, पशु और वृक्ष वनस्पतियों पर पड़ता है।इससे रस की वृद्धि होती है जो इन प्राणियों को पुष्ट करती है।यह ऋतु विसर्गकाल अर्थात दक्षिणायन का अंतकाल कहलाती है और मकर संक्रांति इसी ऋतु का उत्सव है। शीतकाल का खानपान वर्ष भर प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।उन्होनें बताया कि मकर संक्रांति के समय सूर्य जब दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है तो सूर्य कि अग्नि प्रबल होने लगती है।इस प्रबल अग्नि से मृतों को स्वत्व धारक बल प्राप्त होता है।इसीलिए इच्छा मृत्युधारी भीष्म ने इसी काल में प्राण त्यागे थे।इस काल मे प्राण त्यागने का मोक्ष प्राप्त करने या स्वर्ग जाने से कोई सम्बन्ध नहीं है।मकर संक्रांति से एक दिन पहले उत्तर भारत में लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है।अग्निदेव को तिल,गुड़, चावल और सूखे मक्के की आहुति दी जाती है।यह भी एक देव यज्ञ है।भारत के विभिन्न प्रांतों में विभिन्न प्रकार से यह पर्व मनाया जाता है यह विभिन्न परंपराओं का यज्ञ रूप है।साथ ही महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा कि पृथ्वी की 90 प्रतिशत जनसंख्या इसके उत्तरार्ध गोलार्ध में ही निवास करती है।अग्नि और शक्ति की वृद्धि का द्योतक यह पर्व पूरी मानव जाति के लिए उल्लास का दिन है।इस दिन सूर्य की किरणेँ एक विशेष प्रकार की ऊर्जा लिए होती हैं।यज्ञ रूपी परंपराएं हमारे ओज,तेज व बल की वृद्धि करके हमें अधिक समर्थ व उन्नतिशील बनाती हैं।
मुख्य अतिथि आर्य नेता नरेंद्र आर्य सुमन व अध्यक्ष डॉ. कर्नल विपिन खेड़ा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए भारतीय संस्कृति को महान व वैज्ञानिक बताया।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि नई युवा पीढ़ी अपनी गौरव शाली परम्पराओं का सम्मान वा उनपर गर्व करना सीखे।
राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया I
गायिका प्रवीना ठक्कर, कुसुम भंडारी, रविन्द्र गुप्ता, ईश्वर देवी, कमला हंस, जनक अरोड़ा, कमलेश चांदना, रजनी गर्ग आदि ने मधुर गीत सुनाए।











