जलवायु परिवर्तन का देखिए असर, जनवरी में ही काफल से लकदग हुए पेड़

नैनीताल l अप्रैल माह में जंगलों में खिलने वाला जंगली फल काफल दिसंबर माह में खिल गया है। मौसम में तेजी से आ रहे बदलाव का बढ़ा असर पहाड़ों में देखने को मिल रहा है। ये अच्छे संकेत नही है। वनस्पति विज्ञान की विशेषज्ञ प्रो ललित तिवारी ने बताया कि बुराश व काफल अप्रैल की उपज है। तापमान में वृद्धि के कारण इसका फल खिल चुका है। यह आश्चर्यजनक है। आने वाले समय में कृषि में इसी तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। काफल दिसंबर माह में ही आ गया है l दिसंबर माह में ही बुरास के फूल भी जंगलों में खिल गए हैं l अल्मोड़ा जिले के लोहना गांव के जंगलों में पिछले कई दिनों से पेड़ों में काफल लगे हुए है l लोहना गांव के युवक ललित लोहनी उर्फ गुड्डू ने बताया कि दिसंबर माह में जंगलों में काफल देखने शुरू हो गए थे तथा जंगलों में काफल पक चुका है l डीएसबी परिसर के प्रोफेसर तिवारी ने बताया कि कली तथा फूल के खिलने के लिए तापक्रम तथा वर्षण की जरूरत होती है ।पहाड़ों में इन दिनों तापमान वृद्धि हो चुकी है। धूप तेज होने से काफल तथा बुरांश खिलने लगा है । वैश्विक तापक्रम वृद्धि तथा जलवायु परिवर्तन से ये परवर्तन नजर आ रहे है । बुरांश फरवरी मार्च तथा काफल अप्रैल मई में खिलता है ।इससे इनका जीवन चक्र प्रभावित हो रहा है । हमारे शोध में यह स्पष्ट हुआ की बुरांश 26 दिन पहले खिल रहा है। वनस्पतियों में और अधिक शोध की सख्त जरूरत है।











