कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज भवन में गुरुवार को राज्य स्तरीय नैक प्रत्यायन कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ

नैनीताल l कुमाऊँ विश्वविद्यालय के एच०आर०डी०सी० सभागार में उच्च शिक्षा विभाग एवं कुमाऊँ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में राज्य स्तरीय नैक प्रत्यायन कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रदेश के समस्त शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों एवं आई०क्यू०ए०सी० समन्वयकों के लिए नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) प्रत्यायन प्रक्रिया विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में नैक मूल्यांकन के लिए प्रमुख बिंदुओं की जानकारी एवं उसकी तैयारी के संदर्भ में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ० धन सिंह रावत, विशिष्ट अतिथि विधायक श्रीमती सरिता आर्या, कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय प्रो० एन०के० जोशी एवं अपर सचिव उच्च शिक्षा श्री प्रशांत आर्या द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिये प्रदेश के सभी निजी एवं राजकीय उच्च शिक्षण संस्थानों को अनिवार्य रूप से नैक मूल्यांकन कराना होगा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में रोजगारपरक शिक्षा, नवाचार एवं राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहत्तर प्रदर्शन के लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं। उच्च शिक्षा मंत्री ने ऑनलाइन पाठ्यक्रम, ई-ग्रंथालय के उपयोग, एनईपी के तहत कौशल विकास, महिला सुरक्षा, साक्षरता अभियान, क्वालिटी रिसर्च, ग्रीन कैंपस और छात्र-छात्रओं एवं शिक्षकों की उपस्थिति पर विशेष कार्य करने को कहा।
कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० एन०के० जोशी ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में नवाचार एवं गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करना हम सभी का मुख्य ध्येय है। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के मूल्यांकन हेतु नैक मूल्यांकन का विशेष महत्व है। इस कार्यशाला में अनुभवी एवं विशेषज्ञ विद्वानों के द्वारा नैक मूल्यांकन के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जो हम सभी के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि नैक विजिट के लिए आंकड़ों का संकलन बहुत कठिन कार्य है, लेकिन बेहतर टीम वर्क से इसमें सफलता हासिल की जा सकती है। आंकड़ों के संकलन के साथ-साथ इनके प्रस्तुतिकरण पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है और अच्छा ग्रेड हासिल करने में इसकी अहम भूमिका है। इसी के साथ सेल्फ स्टडी रिपोर्ट नैक एक्रिडिटेशन प्रक्रिया की रीढ़ है। एसएसआर का सबसे महत्वपूर्ण अंग क्वालिटी इंडीकेटर फ्रेमवर्क है। इसमें विभिन्न पैमानों पर शिक्षण संस्थान के स्तर की जांच होती है।
निदेशक उच्च शिक्षा प्रो० जगदीश प्रसाद ने कार्यशाला में आये सभी अतिथियों एवं शिक्षाविदों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन निदेशक यू०जी०सी०-एच०आर०डी०सी० प्रो० दिव्या उपाध्याय ने किया।
कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कुलपति, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय प्रो० ओ०पी०एस० नेगी, द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कुलपति, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा प्रो० जगत सिंह बिष्ट एवं विशेष सत्र की अध्यक्षता निदेशक उच्च शिक्षा प्रो० जगदीश प्रसाद द्वारा किया गया।
कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन के रूप में नेक बैंगलोर से आए डॉ० निलेश पांडेय एवम डॉ० श्याम सिंह उपस्थित रहे।
इस अवसर पर समस्त संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, कुलसचिव श्री दिनेश चंद्रा, सहायक निदेशक उच्च शिक्षा डॉ० दीपक पांडेय, डॉ० चमन कुमार, डॉ० रितेश साह, उप कुलसचिव श्री दुर्गेश डिमरी उपस्थित रहे।











