126वें बलिदान दिवस पर प.लेखराम को दी श्रद्धांजलि, धर्मान्तरण को रोकना ही पं.लेखराम को श्रद्धांजलि-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य, हिन्दुओ के लिए प.लेखराम का बलिदान अविस्मरणीय- आचार्य विद्या प्रसाद मिश्र. शुद्धि आन्दोलन की भेंट चढ़ गए पंडित लेखराम – ठाकुर विक्रम सिंह घर वापसी के लिए लेख राम बलिदान हुए- विमलेश बंसल

नई दिल्ली l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में अमर शहीद,रक्त साक्षी प. लेख राम आर्य मुसाफिर के 126 वें बलिदान दिवस पर आर्य समाज लाजपत नगर नई दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।उल्लेखनीय है कि एक धर्मान्ध मुसलमान द्वारा शुद्धि अभियान से रूष्ट होकर 6 मार्च 1897 को लाहौर में छुरा मारकर हत्या कर दी गई थी।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि सत्यनिष्ठ,धर्मवीर,आत्म बलिदानी पं लेखराम अडिग ईश्वर विश्वासी,महान मनीषी,स्पष्ट निर्भीक वक्ता,आदर्श धर्म प्रचारक,त्यागी तपस्वी गवेषक,अच्छे लेखक थे। धर्मान्तरण रोकने और धर्मान्तरित लोगों की घर वापसी व शुद्धि करण के लिए ही पण्डित लेखराम ने अपना जीवन आहूत कर दिया और उनकी हत्या कर दी गई।पं.लेखराम ने महर्षि देव दयानन्द जी का जीवन चरित्र लिखने के लिए पूरे देश में घूम घूम कर प्रमाण एकत्रित किए।आज जब देश में दलित हिन्दु वर्ग का धर्मान्तरण ईसाई मिशनरियों द्वारा पूरे जोरों से किया जा रहा है तो हमारी पं लेखराम को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि आज देश में धर्मान्तरण को रोकने के लिए सबको पूर्ण प्रयास करना होगा।

वैदिक विद्वान आचार्य विद्या प्रसाद मिश्र ने कहा कि हिन्दु धर्म की रक्षा के लिए अनेको लोगों ने बलिदान दिये,उनमें पं.लेखराम का नाम गर्व से लिया जाता है।उन्होंने हिन्दुओं को मुसलमान बनाने के कार्य को रोका व किसी कारण धर्म परिवर्तन कर चुके हिन्दुओं के लिए यज्ञ द्वारा शुद्ध करके घर वापसी का मार्ग प्रशस्त किया।उनका पूरा जीवन वेद प्रचार व शुद्धि आंदोलन के लिए समर्पित रहा।आज उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर हिन्दु समाज को संगठित करने की आवश्यकता है तभी आने वाली बाधाओं से मुकाबला कर सकते हैं।

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आर्य नेत्री विमलेश बंसल
ने भी शुद्धि आंदोलन को राष्ट्र हित में प्रभावी बताया। उन्होंने ने कहा कि नई पीढ़ी को हिन्दू धर्म के योद्धाओं के इतिहास को बतलाने की आवश्यकता है और घर वापसी के अभियान चलाने की आवश्यकता है।

मुख्य अतिथि ठाकुर विक्रम सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि पं. लेखराम ने महर्षि दयानन्द की वैदिक मान्यताओं,सिद्धान्तों व उद्देश्यों के प्रचार को ही अपने जीवन का उद्देश्य बनाया था और अपनी योग्यता व पुरुषार्थ से वैदिक धर्म की महत्वपूर्ण सेवा व रक्षा की,उन्होंने अपने आगे पीछे कपड़े पर आर्य समाज के नियम लिखकर टांग रखे थे।सम्पूर्ण आर्य जगत् व सभी वैदिक धर्मी उनकी सेवाओं एवं बलिदान के लिए सदा-सदा के लिए ऋणी व कृतज्ञ हैं।उनके बलिदान ने यह सिद्ध कर दिया कि वैदिक धर्म के विरोधियों के पास वेद और आर्यसमाज के सिद्धान्तों की काट व उनका उत्तर नहीं है।आज फिर से प.लेखराम जैसे वीरो की आवश्यकता है जो शास्त्रार्थ से वेद विरुद्ध बातों का युक्ति युक्त उत्तर दे सकें और विधर्मी हुए लोगों को शुद्ध करके वापिस हिन्दू धर्म में दीक्षा दे सकें।

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समारोह अध्यक्ष आर्य रवि देव गुप्ता ने कहा कि धर्मवीर पण्डित लेखराम ने अपनी नश्वर देह का त्याग करते हुए आर्यो को यह सन्देश दिया था, ‘‘तकरीर व तहरीर से प्रचार का कार्य बन्द न हो।” आज आर्यों को उनकी इस वसीयत को पूरा करना है,तभी भविष्य में वेदाज्ञा ‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्’ चरितार्थ हो सकता है। आर्य समाज के प्रधान राजेश मेंडिरता ने सभी का आभार व्यक्त किया।पिंकी आर्य, अजय कपूर, सुरेन्द्र तलवार आदि के मधुर भजन हुए।

प्रमुख रूप से आचार्य मेघश्याम वेदांलंकार,रविन्द्र आर्य, विजय मलिक, देवेन्द्र भगत, शकुंतला नागिया, जितेंद्र डावर, रमेश गाडी आदि उपस्थित थे।

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