आर्य समाज और युवा शक्ति” पर संगोष्ठी संपन्न डॉ.नरेंद्र आहूजा विवेक


नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के 45 वे वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में “आर्य समाज और युवा शक्ति ” वेबिनार का आयोजन किया गया I यह करोना काल में 502 वाँ वेबिनार था I

मुख्य वक्ता नरेंद्र आहूजा विवेक (पूर्व राज्य ओषधि नियंत्रक हरियाणा) ने कहा कि हर समस्या का समाधान ईश्वरीय वाणी वेद ज्ञान में निहित होने का पूर्ण विश्वास होने के कारण फिर से खोज प्रारम्भ हुई वेद मंत्रों में जिसमें राष्ट्रभक्त युवा आर्य वीरों में अपेक्षित गुणों का वर्णन किया गया हो। विवेक ने बताया कि ऋग्वेद के इसमन्त्र में ऐसे हों युवा आर्य वीरों का वर्णन है
विप्रासो न मनमभि स्वाध्यो देवाव्यो न यज्ञे स्वप्नस
राजनो न चित्रा सुसदृश क्षितीनां न मर्या अरेपस ।।
अर्थात
विप्रों के समान मननीय विविध विद्याओं का अध्ययन करने वाले हों। यज्ञों से देवों को तृप्त करने वालों के समान सुकर्मा हों। राजाओं के समान सुचित्रित एवं सुदर्शनीय हों। क्षितिजों के समान मनुष्यों को सौमनस्यता तथा निर्मलता प्रदान करने वाले हों। युद्ध में लड़ने के लिए संग्राम में जाने वाले आर्य युवा वीर योद्धा युवाओं में अपेक्षित गुणों का वर्णन
इस वेद मन्त्र में बहुत स्पष्ट रूप से बताया गया है।
युवा योद्धा आर्यवीरों में अपेक्षित गुणों की कुछ विस्तार से चर्चा करते हैं। जिस प्रकार भूमण्डल पर जीवन के लिए वायु , शरीर के जीवित रहने के लिए शरीर में प्राण , यज्ञों को सुचारु रूप से चलाने में यज्ञ कर्ता ऋतविज समाज वा राष्ट्र की रक्षा के लिए वीर युवा स्वयंसेवक प्रहरी रक्षक सुरक्षा कर्मी सेना नायक आर्यवीर सैनिक क्रान्तिवीर उद्योगवीर एवं राष्ट्रवीर आवश्यक होते हैं। राष्ट्र रक्षक युवा वीर अग्नि के समान तेजस्वी , शत्रुओं को मार कर दग्ध कर देने वाले , चौड़ी छाती वाले कर्तव्य कर्म निर्वहन करने वाले उत्कृष्ट ज्ञान परिपक्व सुनीति सौम्य एवं ऋत सही शुद्ध आचरण वाले होने चाहिए। इन आर्यवीरों में जोश के साथ होश बल के साथ बुद्धि होनी चाहिए। हमारे युवा वीर आत्म विज्ञान एवं ब्रह्म ज्ञान से युक्त हों। चूंकि आत्मा शरीर और समाज को बल देने हारे परमात्मा हैं और यह बात स्पष्ट रूप से य आत्मदा बलदा मन्त्र में स्पष्ट आती है इसलिए युवा वीरों को पूर्ण ईश्वर भक्त होकर ईश्वर पर दृढ़ विश्वास करने वाला होना चाहिए।
नरेन्द्र विवेक ने ऐसे आर्य वीरों की तुलना तेज गति से बहती पहाड़ी नदी की ऊर्जा से की जा सकती है। जैसे पहाड़ी नदी यदि तटबन्ध में बंध कर चले तो ऊर्जा का निर्माण करती है और यदि तोड़ कर बस्तियों में बहने लगे तो हिमालयन सुनामी लाकर विनाश का कारण बनती है। ऐसे ही युवाओं को आर्य वैदिक सिद्धांतों से बन्ध कर चलते हुए राष्ट्र समाज परिवार के उत्थान निर्माण का कार्य करना चाहिए। यदि सिद्धांत से बन्ध कर युवा नहीं चलेंगे तो आतंकी उग्रवादी बन कर विनाश करेंगे। प्रत्येक क्रांति को शान्ति पूर्वक करने की प्रेरणा हमें यज्ञ करते समय अग्नि प्रज्वलित करके जल प्रसेचन से भी मिलती है।

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मुख्य अतिथि अजय सहगल (सी ई ओ प्रयाग राज) व सत्य भूषण आर्य (जिला व सत्र न्यायाधीश दरभंगा बिहार) ने भी युवा निर्माण पर जोर दिया I बांग्लादेश से अरनब आर्य ने वहां की स्थिति से अवगत कराया और कहा कि आर्य निर्माण का कार्य जारी रखेगे I परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया व प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया I

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कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य अखिलेशवर जी ने यज्ञ के साथ किया I
प्रमुख रूप से आचार्य
गवेन्द्र शास्त्री ,
कृष्ण देव कौटिल्य (झारखण्ड),
वेदवर्त बेहरा (उड़ीसा), स्वतंत्र कुकरेजा (करनाल), ईश् आर्य (हिसार), भानू प्रताप वेदालंकार (इंदौर), रामकुमार आर्य, यशोवीर आर्य,महेन्द्र भाई (ऑस्ट्रेलिया) आदि के उद्बोधन हुए I

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