आशा कार्यकर्ताओं ने 10 सूत्रीय मांगों को लेकर दिया धरना, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन


नैनीताल। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर आशा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को न्यूनतम वेतन, पेंशन, नियमितीकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि आशा कार्यकर्ता लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार से मासिक मानदेय को बढ़ाकर 11,500 रुपये करने की पूर्व में किए गए वादे को लागू करने की मांग की।

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यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने बताया कि आशाओं को न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा और सेवानिवृत्ति पर अनिवार्य पेंशन देने, सेवानिवृत्ति होने तक राज्य सरकार से मासिक मानदेय जारी रखने तथा रिटायरमेंट के समय दस लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि देने की मांग की। इसके अलावा विभिन्न अभियानों में जाने वाले आशाओं को कई माह तक लंबित रहने वाले प्रोत्साहन के बजाय हर माह भुगतान करने की मांग रखी गई।

ज्ञापन में डेंगू और पल्स पोलियो अभियान के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये भुगतान, सभी सरकारी आशाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार, सरकारी अस्पतालों में रिक्त डॉक्टरों के पद भरने, अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने तथा नेशनल हेल्थ मिशन का बजट बढ़ाकर उसमें एनएचएम कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग भी शामिल है। यूनियन ने मानदेय के नाम पर आशाओं की छंटनी की कोशिश बंद करने की मांग की।

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आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी।

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