नैनीताल में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस पर वेबिनार: प्रशासनिक डेटा को बताया ‘राष्ट्रीय संपत्ति’

नैनीताल l राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी कैंपस स्थित सांख्यिकी विभाग ने सोमवार को ‘प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना’ विषय पर ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया। इसमें विभाग के शिक्षक, परास्नातक छात्र और शोधकर्ता शामिल हुए।
सुशासन के लिए रणनीतिक संपत्ति*: वक्ताओं ने जोर दिया कि सरकारी विभागों में बिखरे प्रशासनिक रिकॉर्ड्स को रणनीतिक संपत्ति के रूप में इस्तेमाल कर साक्ष्य आधारित सुशासन को बढ़ावा दिया जा सकता है। डॉ. स्पर्श भट्ट ने कहा, “प्रशासनिक डेटा एक छिपी हुई राष्ट्रीय संपत्ति है। पारंपरिक सर्वेक्षणों के बजाय इसका सुरक्षित उपयोग नीति निर्माण की गति बढ़ाएगा और नागरिक कल्याण के लिए त्वरित निर्णय संभव होंगे।” विभिन्न मंत्रालयों के डेटाबेस को जोड़कर रियल टाइम सामाजिक-आर्थिक संकेतक तैयार करने पर चर्चा हुई। फाइव सेफ्स’ ढांचे और डीपीडीपी अधिनियम का पालन कर नागरिक डेटा सुरक्षित रखने की बात कही गई। जमीनी अधिकारियों के लिए टूलकिट तैयार करने और “डेटा चैंपियंस” की नियुक्ति का सुझाव दिया गया।वेबिनार में भारत के आधार-डीबीटी, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, यूके के एनएचएस और न्यूयॉर्क के शहरी नियोजन मॉडल से प्रशासनिक डेटा के सफल उपयोग पर भी चर्चा की गई। मुख्य वक्ता विभागाध्यक्ष प्रो. एमसी जोशी ने सांख्यिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला। पंकज शर्मा, भाविका लोहनी, कल्पना कोरंगा, कविता मेहता, कविता चौहान, मानसी सूठा, मेघा रानी, पूजा नायक, शिवानी नेगी, कल्पना रावत, कल्पना वालिया समेत कई वक्ताओं ने पीपीटी के माध्यम से अपने विचार रखे। डॉ. भारत रत्न ने प्रो. पीसी महालनोबिस के योगदान को याद करते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया। वेबिनार का समापन प्रशासनिक डेटा को ‘सार्वजनिक हित’ के रूप में मानने के संकल्प के साथ हुआ, ताकि देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।