यूजीसी मानव संसाधन विकास केन्द्र मैं आयोजित विभिन्न कार्यक्रम संपन्न
नैनीताल l यू0जी0सी0 मानव संसाधन विकास केन्द्र, कुमाँऊ विश्वविद्यालय, नैनीताल में दिसम्बर माह में 04 कार्यक्रम सम्पन्न किये गये। इनमें फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम-13 तथा 14, आपदा प्रबन्ध में शॉर्ट टर्म कार्यक्रम और एक रिफ्रैशर कोर्स शिक्षाशास्त्र में सम्पन्न हुए। इन कार्यक्रमों में देश के विभिन्न राज्यों से आमंत्रित विद्वानों ने ऑनलाईन मोड में व्याख्यान दिये। इन विद्वानों में प्रो0 एन0 के0 जोशी, कुलपति, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल, प्रो0 डी0डी0 शर्मा, कुलपति, सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मण्डी, हिमाचल प्रदेश, प्रो0 मनोज दीक्षित पूर्व कुलपति, राममनोहर लोहिया, अवध विश्वविद्यालय, अवध, उत्तर प्रदेश, प्रो0 एम0पी0 दूबे पूर्व कुलपति, राजर्षि टण्डन विश्वविद्यालय, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, प्रो0 एम0 मुजम्मिल, पूर्व कुलपति, रोहिलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली, उत्तर प्रदेश, प्रो0 अनिसुर रहमान, निदेशक, यू0जी0सी0-मानव संसाधन विकास केन्द्र, जामिया मिलिया, ईस्लामिया, नई दिल्ली, सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने व्याख्यान दिये।
यू0जी0सी0-मानव संसाधन विकास केन्द्र की निदेशक, प्रो0 दिव्या उपाध्याय जोशी ने बताया कि कुमाँऊ विश्वविद्यालय, नैनीताल के मानव संसाधन विकास केन्द्र्र को देश में चौथा स्थान प्राप्त हुआ था और कार्यक्रमों की गुणवत्ता के दृष्टिगत देशभर के विश्वविद्यालयों के शिक्षक इन कोर्सों को करने के लिए नैनीताल को प्राथमिकता प्रदान कर रहे हैं।
स्हायक निदेशक डा0 रीतेश साह ने बताया कि इन कार्यक्रमों के अन्तर्गत फैकल्टी इंडैक्शन प्रोग्राम में क्रमशः देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 66 व 45 प्रतिभागी, आपदा प्रबन्ध में शॉर्ट टर्म कार्यक्रम 66 तथा शिक्षाशास्त्र के रिफ्रैश्र कोर्स में 60 प्रतिभागी सम्मिलित हुए। इन कार्यक्रमों में उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, झारखण्ड, हरियाणा, पंजाब, गोवा, दिल्ली, महाराष्ट्र, आसाम, हिमाचल प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटका, वैस्ट बंगाल, उड़ीसा, बिहार आदि प्रदेशों के सहायक व सह-प्राध्यापकों ने प्रतिभाग किया।
इन कार्यक्रमों को सफल बनाने में डा0 राजेन्द्र सिंह बोरा, इन्द्र सिंह नेगी, श्री जसोद सिंह बिष्ट, अरविन्द सिंह, राजेन्द्र सिंह बिष्ट, कैलाश चन्द्र जोशी, जितेन्द्र सिंह बिष्ट, सौरभ कुमार, नवीन चन्द्र आदि ने योगदान दिया।











