कुमाऊनी शैली में बने घरों के स्थापत्य अध्ययन के लिए गुजरात से नैनीताल पहुंचे छात्र, कुमाऊनी शैली में बने घरों की कला को पहुंचाएंगे देश के कोने कोने तक

नैनीताल। कुमाऊनी शैली में बने उत्तराखंड के घरों की स्थापत्य वास्तुकला को देश के कोने कोने तक पहुंचाने के लिए इन दिनों गुजरात सूरत विश्वविद्यालय का 70 सदस्य दल नैनीताल समेत आसपास के क्षेत्रों के भ्रमण पर पहुंचा है। गुजरात से नैनीताल पहुंचे विश्वविद्यालय के छात्र 5 दिनों तक स्थानीय घरों, ऐतिहासिक भवनों,चर्चाओं समेत मंदिरों व अन्य भवनों के स्थापत्य वास्तुकला का अध्ययन करेंगे। जिसके बाद कुमाऊनी और ब्रिटिश कालीन शैली में बने भवनों की रिपोर्ट का विश्वविद्यालय में जमा करेंगे। जिसके बाद उनकी रिपोर्ट के आधार पर छात्र देश के अन्य कोनों में उत्तराखंडी शैली में बने पहाड़ी घरों को बनाने की कवायद शुरू करेंगे। सूरत विश्वविद्यालय के छात्र राज बताते हैं कि उत्तराखंड के पहाड़ी घरों के डिजाइन इन दिनों काफी चर्चा में है। जिसको देखकर विश्वविद्यालय का दल इन भवनों के अध्ययन के लिए नैनीताल पहुंचा है। नैनीताल में कुमाऊनी शैली पर बने घर वातानुकूलित है जो ठंडे मौसम में घर को गर्म और गरम मौसम में ठंडे रखते हैं। जिस तकनीक का उनकी विश्वविद्यालय के लोग अध्ययन कर रहे हैं। साथ ही पहाड़ी घरों की छत सुंदर और बेहद आकर्षक है। जिन्हें छात्र अपनी रिपोर्ट में सम्मिलित कर आने वाले समय में देश के अन्य कोने में लोगों से अपने घरों की छत कुमाऊनी घरों की तर्ज पर बनाने कि अपील करेंगे क्यों कि ये छत बेहद सुंदर और आकर्षक हैं। विश्वविद्यालय की टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे छात्र राज का कहना है कि विश्वविद्यालय से पहुंचे छात्रों के दल को नैनीताल में 10 टोलियो में बांटा गया है जो नैनीताल,मुक्तेश्वर,भवाली समेत ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर कुमाऊनी घरों का अध्ययन कर रही है।











