कैन्ट बोर्ड को नगर निगम और निकाय में शामिल करने की प्रक्रिया जारी-कैन्ट बोर्ड खत्म होगा लेकिन जमीन केन्द्र सरकार की रहेगी
नैनीताल। उत्तराखण्ड के सभी छावनी परिषद् जल्द ही नगर निगम और निकाय में शामिल होंगे। इसकी प्रक्रिया अभी चल रही है। इस सम्बन्ध में पिछले सप्ताह ही एक पत्र सभी कैन्ट बोर्ड के कार्यालयों में भेजा गया है। यह सुनकर अधिकतर लोग उत्साहित हैं लेकिन हाल ही में दिल्ली में रक्षा सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक की जो विस्तृत बातें सामने आई है वह लीज पर रहने वाले क्षेत्रवासियों के लिए निराशाजनक है। अधिकृत पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि नागरिक क्षेत्र को दी जाने वाली सुविधाओं के लिए निर्मित सम्पत्तियों को नगर निगम और नगरपालिकाओं को बिना शुल्क हस्तान्तरित कर दिया जायेगा। कैन्टोमेन्ट बोर्ड की सारी सम्पत्तियां और दायित्व भी उत्तराखण्ड सरकार के नगर निगम और नगर पालिका को बिना शुल्क हस्तान्तरित की जायेगी। पहले चरण में देहरादून और क्लेमेंट टाउन बोर्ड को शामिल किया गया है। सम्पूर्ण नागरिक क्षेत्र प्रदेश की नगर निगम और नगर पालिका को सौंप दिये जायेंगे लेकिन जहां कहीं भी भारत सरकार का स्वामित्व अधिकार है उसे भारत सरकार द्वारा बरकरार रखा जायेगा। नागरिक क्षेत्र की जमीन का मालिकाना हक केन्द्र सरकार के पास ही रहेगा। लेकिन नगर पालिका व नगर निगम नागरिक क्षेत्र के नागरिकों को सिर्फ पानी, बिजली और सफाई आदि मूलभूत सुविधायें ही उपलब्ध करायी जायेंगी। ऐसी दशा में नगर निगम और नगर पालिका को हस्तान्तरित जमीन का स्वामित्व केन्द्र सरकार के पास ही रहेगा। जिसका कोई फायदा आम नागरिकों को नहीं मिलेगा। नागरिकों के घरों की जमीनों के पट्टे नहीं बन सकेंगे और ना ही लोकल स्थानीय स्तर पर नगर पालिका मकान के नक्शे पास कर पायेगी। रक्षा मंत्रालय के इस निर्णय का सबसे अधिक नुकसान संविदा कर्मचारियों को होगा जिनकी संख्या नैनीताल छावनी में लगभग 80 है। इन कर्मचारियों के बेरोजगार हो जाने पर इनके परिवार के समक्ष आजिविका का संकट उत्पन्न हो जायेगा। छावनी परिषद क्षेत्र जो कि अपनी स्वच्छता तथा अतिक्रमण रहित होने के लिये जाना जाता है निश्चित तौर पर इस पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। छावनी परिषद् नैनीताल के सीनियर कंसलटैन्ट कुँवर सिंह कबडोला ने बताया कि नैनीताल कैन्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वरूण कुमार इस विषय में दिल्ली बैठक में शामिल हुए। मंत्रालय में हुई बैठक से पता चला है कि जितनी भी स्वीकृति कैन्ट बोर्ड या डी०ई०ओ० ऑफिस देता है वह सब मंत्रालय देगा और नगर पालिका और नगर निगम को स्वीकृति देने का कोई हक नही होगा। उन्होने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों और जनता के साथ अन्याय नही होगा। इसमें अन्तिम निर्णय मंत्रालय का होगा।












