काव्य- धारा की श्रृंखला में एक कविता उन छात्र तथा छात्राओ के लिए जो बोर्ड परीक्षा देने वाले हैं।

काव्य- धारा की श्रृंखला में एक कविता उन छात्र तथा छात्राओ के लिए जो बोर्ड परीक्षा देने वाले हैं।

कक्षा से परीक्षा- कक्ष तक………………

कक्षा से परीक्षा-कक्ष का सफर,
पढाई के साथ- साथ धैर्य और तनाव- मुक्ति का है।

कल जब शुरू हो जाएँगे इम्तिहान,
तब सामान्य दिनों जैसा ही सोचना ,
बिना किसी हबड़- तबड़ के बस शांत- भाव अपनाना।
प्रश्न पड़ो फिर पड़ो, जो आए उसे
पहले करो।
भूल जाओ कहीं कुछ अगर,
डरो नहीं बस वो दिन सोचो,
जब क्लास में इसको समझा था।

यह भी पढ़ें 👉  वीकेंड में पर्यटकों ने चहल कदमी की

मेरी कक्षा जैसा ही है,
परीक्षा-कक्ष कोई दैत्य नहीं।
ध्यान रखो कि
ये दिन हर किसी के आते हैं,
फिर भला हम क्यों घबराते हैं।
मेहनत करो, पाठ दोहराओ, और समय पर सो जाओ,
सारे तनाव रुई से उड़ाओ,
ताजगी लिए परीक्षा- कक्ष को जाओ।

यह भी पढ़ें 👉  कुमाऊँ विश्वविद्यालय की छात्रा जापान के प्रतिष्ठित संस्थान जापान एडवांस्ड इंस्टीट्यूट आफ़ ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजीमें इंटर्नशिप हेतु चयनित

-अनुपम उपाध्याय

Advertisement
Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad