चरस तस्करी में दोषी को 12 साल कठोर कारावास, एक लाख जुर्माना लगाया

नैनीताल: द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस राकेश कुमार सिंह की कोर्ट ने तीन किलो पांच सौ ग्राम चरस के साथ पकड़े गए अभियुक्त को एनडीपीएस एक्ट में दोषी करार देते हुए 12 साल कठोर कारावास व एक लाख जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट के आदेश के बाद जेल से लाये गए अभियुक्त को फिर से जेल भेज दिया। बचाव पक्ष जल्द अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देगा।

डीजीसी सुशील शर्मा के नुसार दस 2013 को संदिग्धों की धरपकड़ के लिए एसओजी प्रभारी कमलेश भट्ट, एसआइ राजेश यादव व एसआइ रवींद्र कुमार हल्द्वानी में बरसाती नहर तिकोनिया ठंडी सड़क भोटिया पड़ाव में एक शोरूम के पास पहुंचे। मौके पर पेड़ की आड़ में एक व्यक्ति में संदिग्ध अवस्था में दिखाई दिया। पुलिस कर्मी वहां पहुंचे तो वह घबराने लगा। इसके बाद वह शोरूम से पीछे वाली गली को भागने लगा तो उसे पुलिस कर्मियों ने दबोच लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम मुकेश जोशी पुत्र टीकाराम जोशी, निवासी किरौली, पोस्ट पाटी, थाना लोहाघाट, जिला चम्पावत बताया। उसका कहना था कि वह हल्दूचौड़ में चरस देने जा रहा था। तत्कालीन सीओ लोकजीत सिंह की मौजूदगी में मुकेश की तलाशी ली गई। उससे तीन किलो पांच सौ ग्राम चरम बरामद को गई, फिर आरोपित मुकेश को गिरफ्तार कर लिया गया जबकि बरामद माल को कब्जे में लेकर सीलबंद किया गया। अभियोजन की ओर से डीजीसी फौजदारी सुशील कुमार शर्मा व एडीजीसी पूजा साह ने अपराध साबित करने को आठ गवाह पेश किए। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट से भी साबित हुआ कि बरामद माल चरस ही थी। अभियोजन व बचाव पक्ष की दलील सुनने व गवाहों व सबूतों के आधार पर कोर्ट ने मुकेश को एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत दोषी करार दिया था। गुरुवार को उसे सजा सुनाई गई।

कोर्ट की टिप्पणियों
जहां तक मादक पदार्थ से संबंधित अपराध की प्रकृति है, वह काफी चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुकी है। यह एक अंतरराष्ट्रीय प्रकृति का अपराध है। इसकी सम्पूर्ण विश्व में गतिविधि आपस में जुड़ी है। इसके दुष्परिणाम से कोई भी व्यक्ति अनभिज्ञ नहीं है। जिस प्रकार से यह युवा वर्ग को प्रभावित कर रहा है, उससे ना केवल अर्थव्यवस्था बल्कि देश के अन्दर शांति व्यवस्था एवं स्वतंत्रता पर गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। एनडीपीएस. एक्ट के अंतर्गत दंड के गंभीर प्रावधान हैं, इसके बावजूद भी अपराध की संख्या में कमी नहीं आ रही है तथा इन अपराधों को अधिक तकनीकी माध्यम से किया जा रहा है। नशीले पदार्थ एवं दवाईयाँ गंभीर रूप से मानवाधिकार का अतिक्रमण कर रहा है। ऐसी स्थिति में दोषी व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति प्रदान नहीं की जा सकती है।

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