कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के हार्मिटेज में आज एएनआरएफ-पेयर परियोजना एवं विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला के दूसरे दिन भी जारी रहा

नैनीताल । कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के हार्मिटेज में आज एएनआरएफ-पेयर परियोजना एवं विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला के दूसरे दिन देश के जाने-माने वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने उन्नत पदार्थों, नैनो-संरचनाओं तथा शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर व्याख्यान दिए। कार्यक्रम में शोधार्थियों, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
तकनीकी सत्र में शिवाजी यूनिवर्सिटी के प्रॉफ किरण कुमार के. शर्मा के व्याख्यान से हुई। उन्होंने रासायनिक रूप से अभियांत्रिकीकृत रिड्यूस्ड ग्राफीन आधारित द्वि-आयामी 2डी हेटेरोस्ट्रक्चर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रासायनिक विधियों से ग्राफीन की सतह और संरचना में बदलाव कर आवश्यक गुणों वाले पदार्थ तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने इनके निर्माण, विशेषताओं तथा ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में संभावित उपयोगों पर भी प्रकाश डाला। विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने कंपोजिट और हेटेरोस्ट्रक्चर के बीच अंतर को सरल उदाहरणों से समझाया। उन्होंने बताया कि कंपोजिट में विभिन्न पदार्थ मिश्रित रूप में होते हैं, जबकि हेटेरोस्ट्रक्चर में अलग-अलग पदार्थों की परतों को व्यवस्थित रूप से जोड़ा जाता है।
बंगलुरू यूनिवर्सिटी के प्रो. बसवराज अंगड़ी ने इलेक्ट्रो-ऑप्टिक अनुप्रयोगों के लिए मेटल ऑक्साइड आधारित नैनोकार्बन क्वांटम डॉट्स पर व्याख्यान दिया। उन्होंने इनके निर्माण, विशेष गुणों और इलेक्ट्रॉनिक एवं ऑप्टिकल उपकरणों में संभावित उपयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान पोस्टर प्रस्तुति सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के शोधार्थियों ने भाग लिया। नीलम शर्मा, कुणाल जोशी, मानवी बत्रा और ज्योति जमनाल ने अपने-अपने पोस्टरों के माध्यम से नैनोमटेरियल्स, उन्नत पदार्थों और उनके उभरते अनुप्रयोगों से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी प्रस्तुत की। विद्यार्थियों ने चित्रों, आरेखों और सरल वैज्ञानिक व्याख्याओं के माध्यम से जटिल विषयों को समझाने का प्रयास किया। विशेषज्ञों और शिक्षकों ने पोस्टरों का अवलोकन कर विद्यार्थियों से संवाद किया तथा उन्हें उपयोगी सुझाव दिए। इस गतिविधि से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक संप्रेषण, रचनात्मकता और विषय के प्रति रुचि को बढ़ावा मिला।
भारतीय विज्ञान संस्था बंगलुरू के
प्रो. अशोक रायचूर ने अभियांत्रिकीकृत पॉलीइलेक्ट्रोलाइट नैनो-संरचित बहुपरतीय फिल्मों की डिजाइन और उनके अनुप्रयोगों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि अलग-अलग आवेश वाले पॉलीइलेक्ट्रोलाइट्स की परतों को क्रम से जोड़कर नैनो स्तर पर विशेष गुणों वाली फिल्मों का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने इनके विभिन्न क्षेत्रों में संभावित उपयोगों और शोध की नई संभावनाओं पर भी चर्चा की।
अपने व्याख्यान में भारतीय विज्ञान संस्थान के प्रो. अभिक चौधरी ने शोध एवं शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि एआई का उपयोग साहित्य समीक्षा, डेटा विश्लेषण और शोध लेखन जैसे कार्यों में किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने शोध में एआई के जिम्मेदार, पारदर्शी और नैतिक उपयोग पर विशेष जोर दिया।
दूसरे दिन के सत्रों में प्रतिभागियों को आधुनिक शोध और उन्नत पदार्थ विज्ञान के विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिली। पोस्टर प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक समझ और विचारों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर दिया। आयोजकों के अनुसार, आगामी दिनों में उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सहित अन्य तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। कुलपति प्रॉफ सतपाल सिंह बिष्ट ने अन्य विशेषज्ञों के साथ डॉ नंद गोपल साहू जन्मदिन के अवसर पर पुष्प गुच्छ भेट कर बधाई एवं शुभकामनाएं दी । सेमिनार में डॉ. नंद गोपाल साहू, डॉ. गीता तिवारी, डॉ. महेश चंद्र आर्या, डॉ. पेनी जोशी, डॉ. संतोष उपाध्याय, डॉ. दीपशिखा जोशी, डॉ. गिरीश चंद्र खरकवाल, डॉ. आंचल अनेजा, डॉ. महेंद्र राणा , प्रॉफ ललित तिवारी , डॉ ललित मोहन ,डॉ दीपशिखा जोशी डॉ प्रभात पंत ,नीलम ,प्रियंका तिवारी ,लता ,शीतल ,भावना ,मनीषा जोशी , आयशा ,कुणाल डॉ पूनम सहित शोधार्थी उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों को शॉल उड़ाकर , उत्तराखंड टोपी पहना कर , उनका रेखा चित्र तथा पुष्प गुच्छ भेट करें सम्मानित किया गया ।













