विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने खाराखेत स्थल में जाकर 96वीं वर्षगांठ को मनाया।


देहरादून। आज 22 अप्रैल 2026 को विश्व पृथ्वी दिवस तथा नमक तोड़ो आंदोलन की 96वीं वर्षगांठ पर मैती अभियान, संयुक्त नागरिक संगठन, उत्तराखंड केंद्रीय पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन, शैल कला एवं ग्रामीण विकास समिति, गति संस्था,
पहाड़ी पैडलर्स, महावीर सेवा समिति- प्रेमनगर, सनातन धर्म मंदिर-प्रेमनगर, सीनियर सिटीजन सोसाइटी- प्रेमनगर, सिटीजन फॉर क्लीन एंड ग्रीन एवियंस प्रेमनगर एवं श्रीमती सोनल पनेरू वन क्षेत्राधिकारी- झाझरा रेंज द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित पौधारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में जनसहयोग की भूमिका निभाते हुए दून से खाराखेत स्मारक तक पर्यावरण बचाओ रैली, वृक्षारोपण कार्यक्रम, संवाद गोष्टी का समर्पण का सफल कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में वयोवृद्ध 90 वर्षीय लै. कर्नल बी.एम. थापा, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, उत्तराखंड केंद्रीय पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संयोजक एवं शैल कला एवं ग्रामीण विकास समिति के संस्थापक अध्यक्ष डॉ स्वामी एस चंद्रा, महासचिव- रविंद्र दत्त सेमवाल एवं राजेंद्र प्रसाद शास्त्री, गति संस्था के संस्थापक नीरज उनियाल, समाज सेवी-अर्जुन कोहली, संयुक्त नागरिक परिषद के सुशील त्यागी, अवधेश शर्मा आदि सम्मलित हुए,
देहरादून का दांडी: खाराखेत देहरादून का एक ऐतिहासिक स्थल है, जो प्रेमनगर के पास स्थित है। ये जगह भारत के स्वतंत्रता संग्राम से सीधे जुड़ी है। 20 अप्रैल 1930 को देहरादून के स्वतंत्रता सेनानियों ने यहाँ नून नदी के खारे पानी से नमक बनाकर अंग्रेजों के नमक कानून का विरोध किया था। पंडित नरदेव शास्त्री, महावीर त्यागी, पंडित नारायण दत्त डंगवाल जैसे सेनानियों की अगुवाई में सैकड़ों सत्याग्रहियों ने खाराखेत पहुँचकर नमक बनाया। खड्ग बहादुर ने भी यहाँ नमक बनाया और उसे देहरादून के टाउन हॉल में बेचा गया। इसी वजह से इसे ‘देहरादून का दांडी’ भी कहा जाता है।
पद्मश्री कल्याण सिंह रावत के अनुसार, खारा खेत स्थल समूचे भारत के लिए एक ऐतिहासिक धरोहर है। हमें मिलकर इसे इसकी खोई पहचान और गरिमा लौटानी होगी। ये जगह सिर्फ देहरादून की नहीं, पूरे देश के स्वतंत्रता संग्राम की गवाह है।
डॉ स्वामी एस चंद्रा ने कहा इस स्थल को पर्यटन के लिए तैयार कर जनजागरण करके लोगों तक प्रचार प्रसार करने की जरूरत है परन्तु इसका भी ध्यान दिया जाना जरूरी है कि लोग वहां पर दूषित नहीं कर पाएं,
खारा खेत, देहरादून से पौंधा की तरफ जाकर बिधौली गांव से आगे नून नदी के किनारे ये स्थान है। सभी ने खारा खेत के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति कार्य करने पर जोर दिया। कार्यकम का संचालन सुशील त्यागी ने किया,

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