चोपड़ा ( ज्योलिकोट ) नैनीताल। दिनांक १२-०६-२०२६बृजमोहन जोशी।
श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का पारायण
ग्राम चोपड़ा में श्रीमती कमला सुयाल लीलाधर सुयाल तथा संयुक्त सुयाल परिवार द्वारा दिनांक ५ जून से १२ जून २०२६ तक आयोजित श्री मद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आज हुआ पारायण।
आज प्रातः काल पंचांग पूर्वांग पूजन,श्री कृष्ण पूजन,हवन, पूर्णाहुति,व्यास पूजन हुआ।
व्यास श्री देवेश जोशी जी ने अपने प्रवचन में पारायण शब्द के माहात्म्य को बतलाया।
व्यास जी ने कहा कि हृदय को थाम कर रखना ये दिन लौट कर आयेगा।मनुष्य जीवन पर प्रकाश डालते हुए व्यास जी ने कहा कि मानव जीवन अति दुर्लभ है। यह जीवन सात दिन का ही है। व्यास जी ने कहा कि यदि कथा के दिन घर में कोई साधु महात्मा संन्यासी,कोई व्यक्ति द्वार पर आ जाये तो समझ लीजिएगा कि आपका यह यज्ञ सफल हो गया। व्यास जी ने भगवान की लीलाओं के सम्बन्ध में बतलाया और कहा कि भगवान ने जितनी भी लीलाएं की वो सब सच थी वो सत चित आनन्द है अर्थात ईश्वर सचिदानंद है।
कलियुग के माहात्म्य को बतलाते हुए व्यास जी ने कहा कि किन किन वस्तुओं पर कलियुग का प्रभाव है इस विषय पर भी व्यास जी ने विस्तार से प्रकाश डाला।कलियुग केवल नाम अधारा…।
अनेक जन्मों के जब पुण्य प्राप्त होते हैं तब कहीं जाकर यह सौभाग्य प्राप्त होता है कि हम श्री मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन कर पाते हैं। व्यास जी ने कहा कि मेरा कथा सुनाना तभी सफल होगा सार्थक होगा जब आपका मन निर्मल होगा। व्यास जी ने श्री मद्भागवत ज्ञान कथा यज्ञ की विस्तार पूर्वक जानकारी दी। व्यास जी ने कहा कि अच्छे लोगों का साथ भी सत्संग कहा गया है। व्यास जी ने कहा जिसकी रचना इतनी सुन्दर है वो ईश्वर कितना सुन्दर होगा। इसलिए ईश्वर ने हमें यह मानव जीवन दिया है हमें सत्संग करना चाहिए।हरि अनन्त हरि कथा अनंता..इसे हम सभी को अपने जीवन में उतारना है।
अन्त में व्यास जी द्वारा आयोजकों को तथा इस कथा ज्ञान यज्ञ को सफलता पूर्वक सम्पन्न कराने में सभी महानुभावों को, श्रोताओं का ह्रदय से आभार व्यक्त किया गया।
इसी सन्दर्भ में धन्यवाद के सम्बोधन में आचार्य कैलाश चंद्र सुयाल जी द्वारा सबसे पहले ग्राम चोपड़ा के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी साझा कि गयी सुयाल जी ने बतलाया कि इस गांव में श्वसन देवता के दो मन्दिर हैं,धर्मेश्वर महादेव जी का मन्दिर है,भूमिया देवता का थान है तथा उत्तराखंड में एक मात्र बुड़ भूमिया लोक देवता का मन्दिर भी चोपड़ा में होना सुयाल जी ने बतलाया। सुयाल जी ने इस पुरूषोत्तम मास के माहात्म्य पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। सुयाल जी ने श्री मद्भागवत में कथा व्यास जी के व्यक्तित्व पर भी सुयाल जी ने प्रकाश डाला कि व्यास कैसा होना चाहिए उनमें त्रिदेवों के गुण होने चाहिए इसे ब्रह्मा विष्णु महेश का उदाहरण देकर बतलाया। सुयाल जी द्वारा इस श्री मद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ को सफलता पूर्वक सम्पन्न कराने हेतु सभी महानुभावों का श्रोताओं का, कार्यकर्ताओं का ह्रदय से आभार व्यक्त किया।
व्यास जी द्वारा सभी आयोजकों, ग्राम वासियों, कार्यकर्ताओं को आशीष दी गयी।अन्त में व्यास जी ने सुयाल परिवार की इस एकता,लगन का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि परिवार एक होते हैं एक साथ मिलकर कार्य करते हैं और मातृशक्ति जब इसमें अपनी अहम भूमिका निभाती है तो पुत्री दो कुलों का उद्धार करती है वह अपने ससुराल का भी और अपने मायके का भी मान बढ़ाती है। व्यास जी ने इस के लिए श्रीमद्भागवत कथा की सूत्रधार श्रीमती दीपा सुयाल जी को विशेष रूप से आशीष दी।
इस आयोजन से जुड़े सभी महानुभावों को आशीष दी और हरि कथा को अपने जीवन में उतारे का सभी श्रोताओं से आग्रह किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में व्यास जी देवेश जोशी जी के साथ के साथ उप व्यास मनोज काण्डपाल,आचार्य हेम उपाध्याय,आचार्य कमल तिवारी,तथा संगीत पक्ष में सुमीत बिष्ट,दीपक कांडपाल, मनोज उप्रेती,नीरज नयाल जी ने महत्वपूर्ण सहयोग किया।
इस आयोजन में सुयाल परिवार से श्रीमती कमला सुयाल लीलाधर सुयाल, श्रीमती बसन्ती सुयाल नवीन सुयाल, श्रीमती भगवती सुयाल कैलाश चंद्र सुयाल,श्रीमती भावना सुयाल जगदीश सुयाल,श्रीमती गीता सुयाल हेम सुयाल,श्रीमती अर्पिता सुयाल गोविंद सुयाल , पंकज सुयाल,चेतन सुयाल,भरत सुयाल,दिशा सुयाल, प्रिया,आरव, कान्हा,पारस, श्रीमती रोलिका हर्षित सुयाल, शुभम्, पियूष, चक्षु, नेहा, समस्त सुयाल।
सहयोगियों में मनोज जीना,
भरत जीना,श्याम सिंह,लाल सिंह,पूरन सिंह आदि ने विशेष सहयोग किया।
पारायण के उपरांत विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया था जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।












