यूकेडी का विरोध हाईकोर्ट की मुख्य पीठ नैनीताल से हटाने का प्रस्ताव वापस हो

नैनीताल l उत्तराखण्ड क्रांति दल ने उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। दल के केन्द्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र कुकरेती के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 13 मार्च 2020 को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।
यूकेडी ने कहा कि नैनीताल में हाईकोर्ट की स्थापना उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की मूल परिकल्पना का हिस्सा थी। आंदोलन का उद्देश्य था कि शासन, न्याय और विकास की प्रमुख संस्थाएं पर्वतीय क्षेत्रों में ही रहें। नैनीताल में मुख्य पीठ इसी आकांक्षा का प्रतीक है। देहरादून को अंतरिम राजधानी और भविष्य में गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की बात भी इसी सोच से जुड़ी थी। पत्र में कहा गया कि राज्य गठन के 25 साल बाद भी स्थायी राजधानी तय नहीं हो पाई है। पहाड़ों से पलायन और संस्थागत उपेक्षा पहले से बड़ी समस्या है। ऐसे में हाईकोर्ट जैसी संवैधानिक संस्था को मैदान में ले जाना राज्य गठन के आदर्शों से विचलन होगा और भविष्य में अन्य संस्थाओं के स्थानांतरण का रास्ता खोलेगा। यूकेडी ने सुप्रीम कोर्ट के 15 जुलाई 2026 के आदेश का हवाला दिया। उस आदेश में कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट के स्थानांतरण का प्रश्न न्यायिक नहीं बल्कि प्रशासनिक है और इसका समाधान राज्य सरकार के परामर्श से प्रशासनिक स्तर पर किया जा सकता है।
साथ ही उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 26(2) का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य पीठ का स्थान राष्ट्रपति की अधिसूचना से तय होता है। 3 नवंबर 2000 की अधिसूचना से नैनीताल को मुख्य पीठ बनाया गया था। इसलिए कोई भी बदलाव संवैधानिक प्रक्रिया से ही संभव है।
दल ने कहा कि पिछले ढाई दशक में नैनीताल के आसपास वकीलों, कर्मचारियों, शिक्षा संस्थानों, व्यापार और पर्यटन से जुड़ी एक पूरी अर्थव्यवस्था विकसित हुई है। स्थानांतरण से रोजगार और स्थानीय व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा। यूकेडी ने तीन मांगे रखी राज्य सरकार के स्थानांतरण प्रस्ताव को तब तक स्वीकृति न दी जाए जब तक विधिक और लोकहित के पहलुओं पर विचार न हो जाए। प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए मंत्रिपरिषद को वापस भेजा जाए। ज्ञापन को राष्ट्रपति और केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को भेजा जाए।यूकेडी ने कहा कि यदि आधारभूत कारणों से स्थानांतरण जरूरी भी हो, तो मुख्य पीठ को पहाड़ के भीतर ही रखा जाए और भविष्य में गैरसैंण में स्थापित किया जाए।












