डीएसबी परिसर नैनीताल में शिक्षक दिवस पर गुरुजनों का सम्मान कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय प्रो. नवीन चंद्र लोहनी तथा नवनियुक्त कुलपति प्रो. (कर्नल) सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा—शिक्षक विद्यार्थियों को जीवन में उच्चतम स्तर तक पहुंचाने का माध्यम बनें

नैनीताल, । डीएसबी परिसर, कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल में शिक्षक दिवस के अवसर पर गरिमापूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नौसेना एनसीसी कैडेट्स द्वारा कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने के साथ हुई। परिसर निदेशक प्रो. संजय पंत ने अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर कुमाऊं विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति एवं विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र प्रो. (कर्नल) सतपाल सिंह बिष्ट ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन में उच्चतम स्तर तक पहुंचने के लिए प्रेरित और मार्गदर्शित करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक की सबसे बड़ी इच्छा होती है कि उसके विद्यार्थी जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करें और विश्वविद्यालय तथा समाज का नाम रोशन करें।
प्रो. बिष्ट ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका में व्यापक परिवर्तन आया है। आज शिक्षक को केवल अध्यापक नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और फैसिलिटेटर की भूमिका भी निभानी होगी। विद्यार्थियों के साथ व्यक्तिगत संवाद स्थापित कर उनके मन और भावनाओं को समझना तथा शिक्षक और विद्यार्थी के बीच की दूरी को कम करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अनावश्यक तनाव न लें। जीवन में अंकों से अधिक महत्वपूर्ण चरित्र, संतुलन और प्रसन्नता है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि जीवन को सुंदर बनाने के लिए छोटी-छोटी चीजों को भी बेहतर ढंग से करने का प्रयास करें—“स्मॉल इज ब्यूटीफुल।” उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए अध्ययन सदैव प्राथमिकता रहना चाहिए।
कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय तथा कुलपति उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने शिक्षक दिवस पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण एवं कार्यप्रणाली में नवाचार को अपनाना आवश्यक है। आज के समय में नवाचार, शोध और उद्यमिता शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। तकनीक और सूचना के व्यापक विस्तार के कारण विद्यार्थियों के सामने वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हैं। अब संसाधनों अथवा जानकारी के अभाव को सफलता में बाधा नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद कुमाऊं के विद्यार्थी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। जब शिक्षक निरंतर प्रयास करते हैं तो बेहतर परिणाम सामने आते हैं।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को नशामुक्त भारत अभियान की शपथ दिलाई। वहीं हिमालय बचाओ दिवस के अवसर पर नवनियुक्त कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने हिमालय के संरक्षण एवं संवर्धन की शपथ दिलाते हुए पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
शिक्षक दिवस समारोह में विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों, छात्र नेताओं, कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों तथा सामाजिक जीवन से कार्यकर्ताओं द्वारा दोनों कुलपतियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार की ओर से दोनों कुलपतियों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपेक्षा व्यक्त की गई।
समारोह में सेवानिवृत्त शिक्षकों प्रो. के. बी. मेलकानी, प्रो. मंजू लता बिष्ट, प्रो. ए. बी. मेलकानी प्रो. चित्रा पांडे तथा प्रो. नीता बोरा शर्मा को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन शिक्षकों ने अपने दीर्घ शिक्षण जीवन के माध्यम से विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा उनकी शैक्षणिक एवं मानवीय विरासत नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
कार्यक्रम में कुलसचिव व संकायाध्यक्ष प्रो. रजनीश पांडे, प्रो. एच. सी. एस. बिष्ट, प्रो. अतुल जोशी, प्रो. एस. एस. बरगली, प्रो. रीना सिंह, प्रो. अमित जोशी, प्रो. एल. एस. लोधियाल, प्रो. एन. जी. साहू, प्रो. रीतश साह, प्रो. अर्चना नेगी साह, प्रो. चंद्रकला रावत, प्रो. ज्योति जोशी, प्रो. पी. के. गोस्वामी, प्रो. सावित्री कैरा, प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. संजय टम्टा, प्रो. आर सी जोशी, कुलसचिव एसएसजे डॉ डी एस बिष्ट, छात्र संघ अध्यक्ष करण सती, सचिव जयवर्धन सहित परिसर के शिक्षक, कर्मचारी, एनसीसी कैडेट्स, छात्र-छात्राएं, छात्र प्रतिनिधि एवं विश्वविद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. ललित तिवारी ने किया।










