विश्व पर्यावरण दिवस विशेष

पर्यावरण के बिना तो जीवन संभव नहीं है । पृथ्वी का प्रत्येक दिवस पर्यावरण को समर्पित होना चाहिए किंतु ऐसा संभव प्रतीत नहीं होता है इसीलिए कहा जाता है कि
प्रकृति के पाँच मूल तत्वों—जल, वायु, अग्नि और वनस्पति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने में सर्वप्रथम जल है । जल ही समस्त विश्व का आधार है, जल ही से सभी जीवों का जीवन है।”जलम् सर्वमिदं विश्वम् जलमेव परायणम्। जलम् सर्वभूतानां जीवनम् जलमेव सर्वम्॥”
पर्यावरण के सभी अवयवों में सामंजस्य और शांति की प्रार्थना करने के लिए “ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तयः।वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि अर्थात आकाश, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, औषधियाँ, वनस्पतियाँ, और सम्पूर्ण ब्रह्मांड में शांति हो। सभी जगह शांति का वास हो मंत्र किया जाता है ।
विश्व पर्यावरण दिवस अर्थात 5 जून पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी हेतु जागरूकता फैलाता है। वर्तमान में प्राणीमात्र जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, जल संकट, वनों की कटाई और जैव विविधता के नुकसान जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है, जो पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं ।जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग से पृथ्वी के लगातार बढ़ते तापमान के कारण मौसम चक्र बिगड़ रहा है इसके परिणामस्वरूप भीषण लू , सूखा, अचानक बाढ़ ,वर्षा आने जैसी चरम मौसमी घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है । प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग और इसका खराब कचरा प्रबंधन आज एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है । महासागरों से लेकर सूक्ष्म कणों (माइक्रोप्लास्टिक) के रूप में मानव खाद्य श्रृंखला में भी प्रवेश कर रहा है । तेजी से सूखते जलस्रोत और भूजल स्तर में भारी गिरावट के कारण दुनिया के कई हिस्सों में, शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल की कमी हो रही है ।कृषि और शहरीकरण के लिए अंधाधुंध पेड़ों की कटाई हो रही है। इससे प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं और कई वन्यजीव व पौधे विलुप्त हो रहे है । वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं वायु सहित एयर क्वालिटी इंडेक्स की गुणवत्ता कम कर रहा है, जिसके कारण श्वसन संबंधी बीमारियां आम हो गई है ।पर्यावरण की चुनौतियों से निपटने के लिए सतत विकास को अपनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम “प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए” है जिसका केंद्र बिंदु जलवायु परिवर्तन पर त्वरित कार्रवाई और पर्यावरण संरक्षण है। 5 जून 2026 को इस वैश्विक समारोह की मेजबानी अज़रबैजान (बाकू) द्वारा की जा रही है।
पहला विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 1974 को मनाया गया था।संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन के दौरान इसकी घोषणा की गई थी। पहले विश्व पर्यावरण दिवस का विषय थीम “केवल एक पृथ्वी” रखी गई थी ।
आधुनिक इंसान को पर्यावरण दिवस पर अपनी जीवनशैली में प्रकृति-अनुकूल बदलाव करने होंगे तथा सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का बहिष्कार, ऊर्जा-जल की बचत (रेनवाटर हार्वेस्टिंग), कचरे का उचित प्रबंधन (गीला/सूखा अलग करना) और अधिक पेड़ पौधे लगाना शामिल है ।रोजमर्रा में रिड्यूस ,रीयूज तथा रिसाइकल का पालन करना सबसे प्रभावी कदम है। तकनीकी विकास के बीच पर्यावरण को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती है। पर्यावरण दिवस हर इंसान को :प्लास्टिक का त्याग ,कपड़े या जूट के थैलों का प्रयोग ,जल और ऊर्जा की बचत , छतों पर वर्षा जल को नीचे स्टोर करे ,छोटी दूरी के लिए पैदल या साइकिल का उपयोग ,लंबी दूरी के लिए सार्वजनिक परिवहन या कार-पूलिंग का इस्तेमाल । कचरा प्रबंधन के लिए कचरे को गीले और सूखे में विभाजित कर खाद और जैविक खेती को अपनाना होगा । पेड़ लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि इंसान को अपने जन्मदिन या शादी की सालगिरह जैसे विशेष मौकों पर पौधे लगाने की आदत और उनके बड़े होने तक देखभाल करने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी । प्रकृति के लिए अपने जीवन से
समय निकालकर पर्यावरण की समस्याओं को समझें , लोगों को भी जागरूक करे ।आधुनिक जीवनशैली में पर्यावरण को
पर्यावरण की सुरक्षा और सुधार के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1986 में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम तथा 2002 में जैव विविधता संरक्षण नियम लागू है इसके तहत केंद्र सरकार को देश भर में प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं जिससे पर्यावरण से सतत विकास को पूर्ण किया जा सके । पर्यावरण है तो हम है ये सोच का क्रियान्वयन समय की पुकार है ।वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥” इस मंत्र में सम्पूर्ण सृष्टि—आकाश, पृथ्वी, जल, औषधियाँ, वनस्पतियाँ, देवता, ब्रह्म और समस्त जगत के लिए शांति की कामना तथा पर्यावरण के सभी घटकों में संतुलन और सामंजस्य की प्रार्थना करता है। Doctor Lalit Tiwari












