विश्व पुस्तक दिवस विशेषविश्व पुस्तक दिवस यूनेस्को द्वारा 23 अप्रैल दिवस चुना गया


2026 में विश्व पुस्तक दिवस (23 अप्रैल) का मुख्य फोकस रीड योर वे ,अपने तरीके से पढ़ें है, जो पढ़ने के आनंद ,उसकी आदत बढ़ाने और अपनी पसंद की पुस्तकें चुनने तथा ज्ञान साझा करने के अधिकार पर जोर देता है। 2010 के अनुसार, दुनिया में लगभग 129,864,880 अद्वितीय किताबें हैं। यह आँकड़ा प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार के बाद से आई एस बी एन पुस्तकालयों और अन्य स्रोतों से प्राप्त डेटा के आधार पर निकाला गया था। इसके अतिरिक्त, हाल ही में भगवद गीता को यूनेस्को की विश्व धरोहर में भी शामिल किया गया है तथा राम चरित मानस में ‘राम’ शब्द 1443 बार आया है।
रामचरितमानस की पांडुलिपियों को यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर में शामिल किया गया है।सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में बाइबिल दुनिया जिसकी 2021 तक 5 से 7 अरब प्रतियां बिकी हैं तथा कुरान की 4 अरब से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, 2023 तक 100,100 पृष्ठों वाली पुस्तक अब तक की सबसे मोटी पुस्तक है।
2026 में नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में रिकॉर्ड संख्या में पाठक पहुंचे, जो दुनिया में पुस्तकों के प्रति रुचि दर्शाता है। महान भारतीय हिंदी पुस्तकों में
राग दरबारी – श्रीलाल शुक्ल ,
गुनाहों का देवता – धर्मवीर भारती,
रश्मिरथी – रामधारी सिंह ‘दिनकर’,
मैला आँचल – फणीश्वरनाथ ‘रेणु’,
चित्रलेखा – भगवतीचरण वर्मा।
सत्य के साथ मेरे प्रयोग – महात्मा गांधी ,
मैं नास्तिक क्यों हूँ – भगत सिंह की है तो प्रेरक। पुस्तकों में
द मैजिक ऑफ थिंकिंग बिग (सोच का चमत्कार) ओर
मन की शक्ति शामिल है ।पुस्तके ज्ञान का आधार है जीवन को सही मार्ग दिखाते है इसीलिए। कहा गया है ।पुस्तके पठितः पाठः जीवने नैव साधितः ।
किं भवेत् तेन पाठेन जीवने यो न सार्थकः ॥
अर्थ: यदि पुस्तक में पढ़े गए पाठ को जीवन में धारण न किया गया, तो उस पढ़े हुए का क्या लाभ जो जीवन में सार्थक न हो? डॉक्टर ललित तिवारी

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