राज्य के संतुलित विकास और स्थानीय लोगों के सशक्तिकरण के लिए 5 सूत्रीय नीतिगत एजेंडा “संकल्प, नए उत्तराखंड का” जारी किया, यूकेडी नेताओं की पत्र

देहरादून । उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने आगामी चुनावों के मद्देनजर राज्य के संतुलित विकास और स्थानीय लोगों के सशक्तिकरण के लिए अपना 5 सूत्रीय नीतिगत एजेंडा “संकल्प, नए उत्तराखंड का” जारी किया है। दल के नीति निर्धारण समिति के पदाधिकारियों व शीर्ष नेतृत्व में शामिल दल के अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती, वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी, डॉ. नारायण सिंह जंतवाल व अन्य ने देहरादून में प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि यूकेडी सुशासन एवं स्वशासन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस नीतिगत एजेंडे में उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय समुदायों के पारंपरिक अधिकारों को मजबूत करने की बात कही गई है।
इस एजेंडे की पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता उत्तराखंड के लिए अनुच्छेद 371 के अंतर्गत पृथक संवैधानिक प्रावधान लागू करने की मांग है। यूकेडी का कहना है कि यह विशेष वित्तीय रियायतों की मांग नहीं है, बल्कि नागालैंड, मिजोरम और सिक्किम की तर्ज पर राज्य के पहाड़ों, प्राकृतिक संसाधनों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को स्थायी सुरक्षा प्रदान करने का एक प्रयास है। इसके क्रियान्वयन के लिए दल ने प्रशासनिक पुनर्गठन का खाका भी तैयार किया है, जिसके तहत राज्य के 13 जिलों को तीन मंडलों -गढ़वाल, कुमाऊं और तराई मंडल में विभाजित किया जाएगा। साथ ही, भविष्य के परिसीमन में पर्वतीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व न घटे, इसके लिए विधानसभा की 70 सीटों में से पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के लिए71:29 का अनुपात संवैधानिक रूप से सुरक्षित रखा जाएगा ।
भूमि सुधारों को लेकर यूकेडी ने राज्य में “सही भू-कानून” लागू करने का बड़ा वादा किया है। दल का प्रस्ताव है कि उत्तर प्रदेश और ब्रिटिश काल के सभी पुराने व बिखरे हुए कानूनों को निरस्त कर एक नया, व्यापक और राज्य-विशिष्ट भूमि कानून बनाया जाएगा। यह कानून पर्वतीय क्षेत्रों में अनियोजित विकास पर नियंत्रण लगाने, चकबंदी (भूमि समेकन) को व्यावहारिक बनाने और भूमि के अनियंत्रित हस्तांतरण को रोकने में मददगार साबित होगा ।
इससे भूमि विवादों और म्यूटेशन जैसे राजस्व मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित हो सकेगा और सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। इसके अलावा, दल ने राज्य की सबसे गंभीर समस्या ‘विवश पलायन’ को समाप्त करने के लिए एक समग्र रणनीति की घोषणा की है। यूकेडी का संकल्प है कि पहाड़ों को ही समृद्धि और संपदा सृजन का केंद्र बनाया जाए ।
इसके लिए भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को राज्य की स्थायी राजधानी घोषित करने, प्रत्येक विकासखंड में आधुनिक आवासीय सरकारी स्कूल व मल्टी-
स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन के लिए एक समर्पित प्राधिकरण स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इन उपायों से पर्वतीय जिलों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और अवसर आधारित ‘रिवर्स माइग्रेशन’ (घर वापसी) को बढ़ावा मिलेगा ।
आरक्षण नीति में बड़े बदलाव का संकेत देते हुए यूकेडी ने “आरक्षण के भीतर आरक्षण” की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अनुसूचित जाति (SC) के 19% और अनुसूचित जनजाति (ST) के 4% वर्तमान ऊर्ध्वाधर आरक्षण में बिना कोई बदलाव किए, इसका 50% हिस्सा इन समुदायों के केवल आर्थिक रूप से वंचित (नॉन-क्रीमी लेयर) वर्गों के लिए निर्धारित किया जाएगा सर्वोच्च न्यायालय के ‘स्टेट ऑफ पंजाब बनाम दविंदर सिंह (2024)’ के फैसले को आधार बनाते हुए दल ने कहा कि उत्तराखंड की विशिष्ट परिस्थितियों में आर्थिक वंचना को आधार बनाना सबसे उपयुक्त है। इसके लिए 2027 की जनगणना के निष्कर्षों और एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर पारदर्शिता के साथ पात्रता मानदंड तय किए जाएंगे ।
पत्रकार वार्ता में नारायण सिंह जन्तवाल, अध्यक्ष समिति सुरेन्द्र कुकरेती (केंद्रीय अध्यक्ष उत्तराखंड क्रांति दल) काशीसिंह ऐरी (पूर्व विधायक एवं अध्यक्ष) डा. सुरेश नेगी (संयोजक समिति) डा शक्ति शैल कपरवाण, सदस्य मीनाक्षी घिल्डियाल, सदस्य ललित बिष्ट, सदस्य, लताफत हुसेन, विजय बौड़ाई, संचालक पंकज व्यास व जयप्रकाश उपाध्याय (दोनों कार्यकारी अध्यक्ष )
बहादुर रावत, गणेश काला, गुड्डू उप्रेती, कैलाश भट्ट, आनन्द सिलमांना, एडवोकेट समीर मुन्डेपी आदि आदि उपस्थित रहे l