सुभाष चंद्र बोस हॉस्टल हल्दूचौड़ में दो दिवसीय बाल फिल्म समारोह शुरू

नैनीताल । नेताजी सुभाष चंद्र बोस हॉस्टल हल्दूचौड़ में आज से दो दिवसीय बाल फिल्म समारोह शुरू हुआ।फिल्म समारोह के पहले दिन बच्चों द्वारा देशभक्ति के साथ साथ बाल मनोविज्ञान पर आधारित फिल्में देखी गई।समारोह की शुरुआत जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक भारत एक खोज पर श्याम बेनेगल निर्देशित टी वी सीरियल के भारत माता की जय एपिसोड से हुई।उसके बाद फिल्म समारोह संयोजक नवेंदु मठपाल ने बच्चों को फिल्म आवाज और चित्रों के संयोजन के बाबत जानकारी दी।फिरबच्चों
ने ऑस्कर पुरस्कृत फिल्म रेड बलून देखी।
‘द रेड बैलून’ 1956 में निर्मित एक प्रसिद्ध फ्रांसीसी फंतासी लघु फिल्म है। अल्बर्ट लैमोरिस द्वारा लिखित और निर्देशित 34 मिनट की यह फिल्म एक छोटे लड़के और जादुई रूप से सजीव, मूक लाल गुब्बारे की दोस्ती को दर्शाती है। यह फिल्म मासूमियत और कल्पना का एक सुंदर प्रतीक है ।1950 के दशक के पेरिस में एक युवा लड़का सड़क से एक लाल गुब्बारे को बचाता है। जल्द ही उसे पता चलता है कि यह गुब्बारा कोई सामान्य गुब्बारा नहीं है; इसमें अपनी जान है और यह उसका वफादार साथी बन जाता है। यह लड़का और गुब्बारा साथ खेलते हैं, स्कूल जाते हैं और शहर की गलियों में घूमते हैं।गुब्बारे को ईर्ष्यालु लड़कों की एक टोली द्वारा चुराने की कोशिश की जाती है। अंत में, एक मार्मिक दृश्य में सभी गुब्बारे उस लड़के को आसमान में ऊपर ले जाते हैं। इस फिल्म ने 1956 में कान फिल्म फेस्टिवल में ‘पाम डी’ओर’ ( और सर्वश्रेष्ठ पटकथा के लिए ‘ऑस्कर पुरस्कार’ जीता था।यह फिल्म संवाद के बिना भी भावनाओं को इतनी खूबसूरती से व्यक्त करती है कि यह हर उम्र के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
इसके अलावा बच्चों ने कंचे और पोस्टकार्ड फिल्म देखी।
इस फिल्म में एक स्कूली छात्र, विपिन को अपने दोस्तों के साथ कंचे का खेल खेलने के से रोका जाता है,उसके परिवारजन उसकी भावना के खिलाफ उसको जबरदस्ती दूसरे खेल खेलने को मजबूर करते हैं। निराशा की निरंतर भावना के बीच विपिन, जीवन का एक नया अर्थ खोजता है।बाल मनोविज्ञान पर यह एक बेहतरीन फिल्म है।इस मौके पर हॉस्टल वार्डन
हिमांशु पांडे,प्रशासनिक अधिकारी कैलाश चंद्र सिंह,महेश चंद्र जोशी,मोहित सिंह,विजय राज,भावना मेहता,मंजू मिश्रा,ममता शर्मा मौजूद रहे।











