नैनीताल पालिकाध्यक्ष और सभासद आमने सामने
नैनीताल। तीन दिन पहले हुए लेकब्रिज चुंगी टेंडर को लेकर पालिकाध्यक्ष और सभासद आमने सामने आ गए हैं। सभासदों ने टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए, तो अध्यक्ष ने इसे विधिक राय और प्रशासनिक संरक्षण के आधार पर टेंडर को सही ठहराया है। शुक्रवार को सभासदों ने पत्रकार वार्ता में सभासदों ने कहा कि बोर्ड को दरकिनार कर विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाया जा रहा है।। सभासदों ने कहा कि 14 जुलाई को बिना बोर्ड बैठक के टेंडर खोलना लोकतंत्र की हार है। सभासद जितेंद्र पाण्डे ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष के टेंडर बोर्ड बैठक के बाद ही खोले जाने का आश्वासन के बावजूद पहले ही खोल दिया गया। सभासदों न कहा कि 1 जून 2026 को टेंडर कॉल किया गया, निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 10 जून थी। 7 जुलाई को बोर्ड बैठक का एजेंडा जारी हुआ था, लेकिन अध्यक्ष के पारिवारिक शोक के कारण बैठक स्थगित हुई। इसके बाद 18 जुलाई तक बैठक टाल दी गई। 22 जून को धरना-प्रदर्शन के बाद 23 जून को लिखित आश्वासन मिला था कि लेकब्रिज निविदा अगली बोर्ड बैठक तक स्थगित रहेगी। नए टेंडर में पुराने टेंडर के मुकाबले बाइक शुल्क जोड़ा गया है। सभासद मुकेश जोशी ‘मंटू’ ने कहा कि दोपहिया वाहन शुल्क गजट में बोर्ड से ही पास हुआ था। यदि बोर्ड बैठक समय पर होती तो विवाद ही नहीं होता। उन्होंने कहा “अगर बोर्ड बैठक का महत्व नहीं है तो हम इस्तीफा देने को तैयार हैं। जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट भी जाएंगे।” सभासदों ने कुमाऊं आयुक्त से पूरे मामले की जांच और धारा 34 के तहत बोर्ड भंग कर नए चुनाव की मांग की है। पत्रकार वार्ता में भगवत रावत, गजाला कमाल, अंकित चंद्रा, काजल आर्या, सुरेंद्र कुमार, रमेश प्रसाद आदि मौजूद रहे।











