गंगा दशहरा पर विशेष


भारतीय संस्कृति ,शुद्ध भारतीयता एवं उसके आध्यात्मिकता की पहचान मां गंगा है । गंगा एक नदी नहीं ,
मोक्षदायिनी और साक्षात् ईश्वर का स्वरूप है। आध्यात्मिक पक्ष में गंगा शुद्ध चेतना, ज्ञान और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति देती है। यह मनुष्य के शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के पापों को धोकर उसे पवित्र करती है। पुराणों कहते है कि गंगा स्नान करने, जल पीने या मात्र स्मरण करने से ही व्यक्ति जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।भागीरथ की कठोर तपस्या से गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर आईं, वैसे ही गंगा का अवतरण साधक की अंतरात्मा में ‘ब्रह्मज्ञान’ (उच्च ज्ञान) के उतरने का प्रतीक है।गंगा जल को सबसे पवित्र माना जाता है। वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर यह माना जाता है कि गंगा में जल को स्वयं शुद्ध करने की अद्भुत क्षमता है, जो बाहरी और आंतरिक दोनों तरह की अशुद्धियों को नष्ट करती है।गंगा मैया की कृपा हेतु ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायणी नमो नमः।श्लोक: गंगा गंगेति यो ब्रूयात, योजनानां शतैरपि। मुच्यते सर्वपापेभ्यो, विष्णुलोके स गच्छति अर्थात सौ योजन दूर से भी गंगा-गंगा कहने से मनुष्य पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक जाता है।
मानसिक शांति हेतु गंगा जी का मूल मंत्र बहुत ही शक्तिशाली माना जाता है ।ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः॥
गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है तथा 2026 में यह 25 मई को मनाया जाएगा तथा उत्तराखंड में इस दिन द्वार पत्र लगाने की परंपरा है ।धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से अवतरित होकर धरती पर आई थीं। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने और दान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के दस तरह के पाप (शारीरिक, वाचिक और मानसिक) धुल जाते हैं। यह ‘गंगावतरण’ दिवस भी कहा जाता है।
गंगा नदी भारत की सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र नदी है। हिमालय के गंगोत्री ग्लेशियर से ‘भागीरथी’ के रूप में निकलकर, देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर यह गंगा कहलाती है। कुल 2,525 किलोमीटर की यात्रा तय कर यह बंगाल की खाड़ी में गिरती है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी से गोमुख गंगोत्री हिमनद से देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा के संगम से गंगा ऋषिकेश , हरिद्वार प्रयागराज ,वाराणसी बिहार ,बंगाल से बहती हुई ब्रह्मपुत्र (जमुना) के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा सुंदरबन बनाती है । यमुना , घाघरा, गंडक, कोसी, सोन और दामोदर गंगा की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।गंगा केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भारत की जीवनरेखा और आस्था का मुख्य केंद्र है।
शिवजी की जटाओं ने गंगा का वेग कम किया तथा ये पृथ्वी पर आईं। । गंगा को धरती पर लाने के लिए महाराज भगीरथ ने जो अथक प्रयास किए, उसी के कारण किसी भी कठिन कार्य में की जाने वाली कड़ी मेहनत को ‘भगीरथ प्रयास’ कहा जाता है।
वैदिक गणना के अनुसार, इस दिन गंगा में स्नान और पूजा करने से मन, वाणी और कर्म द्वारा किए गए 10 प्रकार के पाप धुल जाते हैं。दसों दिशाओं की शुद्धि: इस दिन दसों दिशाओं के दिग्पालों की पूजा की जाती है और गंगा में खड़े होकर ‘गंगा स्तोत्र’ का पाठ करने से साधक को शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है: शास्त्रों में उल्लेख है “गंगा तव दर्शनात् मुक्तिः” अर्थात् गंगा के दर्शन, स्पर्श और स्नान मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है。
गंगा नदी जो पारिस्थितिक, आर्थिक, कृषि और आध्यात्मिक स्तर पर अनगिनत लाभ प्रदान करती है। यह करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार, उपजाऊ भूमि की निर्माता और सनातन धर्म में मोक्षदायिनी मानी जाती है。 गंगा अपने साथ हिमालय से उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी लाती है, जिससे इसके मैदानी इलाकों में धान, गेहूं और अन्य फसलों की शानदार पैदावार होती है ।सिंचाई ,जलविद्युत ,जल परिवहन राष्ट्रीय जलमार्ग-1 का एक प्रमुख हिस्सा है, जो व्यापार को सस्ता और सुगम बनाती है। वैज्ञानिक परीक्षणों में पाया गया है कि गंगाजल में वातावरण से ऑक्सीजन सोखने की अद्भुत क्षमता होती है ।जीवाणुभोजी गंगा जल जीवाणु हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणुओं को पनपने नहीं देते है ।आत्मा की शुद्धि के साथ तीर्थाटन और पर्यटन भी गंगा ही है ।
गंगा संरक्षण के लिए भारत सरकार ‘नमामि गंगे’ नामक प्रमुख एकीकृत मिशन चलाया है, स्पर्श गंगा मिशन भी चलाया गया है जो गंगा की निर्मल धारा को बनाए रखने में सहायक हो।सभी को गंगा अवतरण दिवस की बधाई।डॉ ललित तिवारी

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