जल वायु टावर्स में शंखध्वनि से होगा मां दुर्गा का स्वागत, आयोजन- 15 अक्टूबर को सामूहिक शंखध्वनि से शुरुआत, 16 से 21 अक्टूबर तक होंगे पूजा-अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम

देहरादून। झाझरा स्थित जल वायु टावर्स में इस वर्ष दुर्गा पूजा का शुभारंभ 15 अक्टूबर को सामूहिक शंखध्वनि के साथ होगा। इसके बाद 16 से 21 अक्टूबर तक छह दिनों तक पूजा-अनुष्ठान और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। दुर्गा पूजा समिति एवं सांस्कृतिक संघ की ओर से रविवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी गई।समिति के सदस्य डॉ. विनय कांडपाल, डॉ. तनुप्रिया चौधरी, तरित मित्रा और अभिषेक रंजन ने बताया कि 15 अक्टूबर को अपराह्न तीन बजे सोसाइटी के सामुदायिक प्रांगण में सामूहिक शंखध्वनि का आयोजन किया जाएगा। इसमें महिलाओं, बच्चों और परिवारों को शंख के साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। जो लोग शंख बजाना नहीं जानते, उन्हें भी मौके पर इसकी जानकारी दी जाएगी। समिति के सदस्यों ने बताया कि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी है। इसी उद्देश्य से बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।छह दिनों तक होंगे विविध आयोजन पूजा की शुरुआत 16 अक्टूबर को षष्ठी पूजा और शाम को देवी के विधिवत आवाहन के साथ होगी। इस दौरान चंडी पाठ, आगमनी और बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 17 और 18 अक्टूबर को सप्तमी के तहत नवपत्रिका प्रवेश और प्राण प्रतिष्ठा होगी। 18 अक्टूबर को बच्चों की फैंसी ड्रेस और चित्रकला प्रतियोगिताओं के साथ सभी आयु वर्गों के लिए शंख वादन प्रतियोगिता होगी। शाम को धुनुची नृत्य, जादू का प्रदर्शन और सोसाइटी की महिलाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे। 19 अक्टूबर को अष्टमी पर श्रद्धालु पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और संधि पूजा में शामिल होंगे। शाम को वरिष्ठ नागरिक भजन, कीर्तन और लोकगीत प्रस्तुत करेंगे। 20 अक्टूबर को नवमी पर कुमारी पूजा और यज्ञ के बाद डांडिया व गरबा का आयोजन होगा। पूजा के सभी दिनों में श्रद्धालुओं के लिए पुष्पांजलि, भोग और संध्या आरती की व्यवस्था रहेगी। 21 अक्टूबर को शोभायात्रा के साथ होगा समापन। 21 अक्टूबर को दशमी के दिन दर्पण विसर्जन, देवी वरण और सिंदूर खेला के साथ उत्सव का समापन होगा। देवी वरण के लिए टोकन व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद शोभायात्रा निकालकर मां दुर्गा को विधिवत विदाई दी जाएगी। समिति के सदस्यों ने बताया कि सोसाइटी में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए परिवार रहते हैं। दुर्गा पूजा सभी को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक एकता और सामूहिक सहभागिता का संदेश देती है। आयोजन में सभी लोगों का स्वागत है और कार्यक्रमों में भागीदारी पूरी तरह निःशुल्क रहेगी।













