नैनीताल में युगमंच के स्वर्ण जयंती वर्ष में दो विशेष नाट्य प्रस्तुतियां

नैनीताल l रंगकर्म और कला की 50 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी कर चुके युगमंच का वर्ष 2026-27 स्वर्ण जयंती वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में युगमंच और प्रयोगांक सोसाइटी फार सोशल एण्ड इन्वयर्नमेंटल डेवलपमेंट के संयुक्त तत्वावधान में अगस्त माह में दो महत्वपूर्ण नाटकों का मंचन किया जाएगा। युग्मांच संस्था संस्थापक जहूर आलम ने बताया कि असगर वजाहत द्वारा लिखित यह नाटक 1947 के भारत-पाक विभाजन की त्रासदी और उसके मानवीय सरोकारों को केंद्र में रखता है। नाटक रतन की मां के चरित्र के माध्यम से उस पीढ़ी की पीड़ा दिखाता है जो अपनी जड़ों से कटने को तैयार नहीं थी। हवेली, रिश्ते और मजहबी तंगदिली के बीच इंसानियत की जीत को यह नाटक रेखांकित करता है। युगमंच द्वारा देशभर में इस नाटक की लगभग 50 प्रस्तुतियां हो चुकी हैं। पहला मंचन एनएसडी में हुआ था। मिथिलेश पाण्डे, अदिति खुराना, प्रियांशु आर्या, हर्षिता गुसाई, भाष्कर बिष्ट, जहूर आलम, मनोज कुमार, पवन कुमार, डी.के. शर्मा, नवीन बेगाना, नीरज डालाकोटी, सौरभ बिष्ट, नकुल सिंह बिष्ट, युवराज सिंह करायत आदि।यह नाटक तीसरे विश्वयुद्ध के बाद की डिस्टोपियन और एब्सर्ड पृष्ठभूमि पर आधारित है। एक बंकर में छिपे चार लोगों की कहानी के जरिए युद्ध की विभीषिका से उपजे जीवन दर्शन, प्रेम, विवेक और नैतिकता के ह्रास को दिखाया गया है। नाटक का मूल कथ्य देशों के बीच युद्ध नहीं, बल्कि इंसान के भीतर की इंसानियत और पशुता के बीच का आखिरी संघर्ष है।कलाकार मदन मेहरा, दीपक सहदेव, राजेश आर्या, योगिता तिवारी, पार्श्व ध्वनि – उमेश काण्डपाल, वेशभूषा – एच.एस. राणा, प्रकाश – योगिता तिवारी, राजेश आर्या, दीपक सहदेव, मंच नियोजन – उमेश काण्डपाल, संगीत संयोजन – मदन मेहरा
प्रयोगांक, नैनीताल वर्ष 2001 से रंगमंच में सक्रिय है और 2006 में पंजीकृत संस्था के रूप में कार्यरत है। अब तक अंधा युग, नीति चरित्रम्, भोलानाथ, दुनिया द्विरंगी सहित 35 से अधिक नाटकों और 10,000 से अधिक नुक्कड़ नाटकों का मंचन कर चुकी है।1976 में स्थापित युगमंच ने नाटक, साहित्य, पर्वतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा दिया है। होली महोत्सव के जरिए कुमाऊंनी होली गायन को पुनर्जीवित करने, एनएसडी-एफटीआई तक दर्जनों कलाकार भेजने और भारत रंग महोत्सव जैसे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति देने का गौरव इसे प्राप्त है। स्वर्ण जयंती वर्ष को भव्य और यादगार बनाने के लिए युगमंच ने रंगकर्मियों और आमजन से सहयोग की अपील की है। इस मौके पर रंग कमी मिथिलेश पांडे हरीश राणा दीपक सहदेव नवीन बेगाना मदन मेहरा आदि मौजूद थे ।

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