167वॉ स्वामी श्रद्धानन्द का जन्मोत्सव धूम धाम से संपन्न शुद्धि आंदोलन पुनः चलाने की आवश्यकता -बिमलेश बंसल राष्ट्रीय एकता और अखंडता की मिसाल थे स्वामी श्रद्धानन्द -राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य दिल्ली,बुधवार,22/02/2023, गुरुकुल कांगडी हरिद्वार के संस्थापक


नैनीताल l अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानन्द का 167वॉ जन्मोत्सव आर्य समाज,अशोक विहार, फेस-1, दिल्ली
में आर्य नेता ओम सपड़ा की अध्यक्षता में धूम धाम से संपन्न हुआ।

वैदिक विदुषी आचार्या विमलेश बंसल (दर्शनाचार्या) ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का प्रारंभ किया उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद के शुद्धि आन्दोलन (घर वापिसी) को तेज कर धर्मांतरण के अभिशाप से देश को मुक्ति दिलाएंगे।इस कार्य के लिए गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली, सेवा कार्यों के विस्तार के साथ हवन व सत्संगों के माध्यम से वैदिक संस्कारों व राष्ट्रीय जीवन मूल्यों के प्रति सजगता लानी होगी।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी श्रद्धानन्द जी का जीवन भटकते लोगों के लिये प्रकाश पुंज के समान है।हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देश की एकता अखंडता के लिये कार्य करना चाहिए,यह गर्व की बात है कि आर्य समाज के लोगों में देश भक्ति का जज्बा कूट कूट कर भरा हुआ है जो अत्यंत प्रशंसनीय है। स्वामी श्रद्धानन्द राष्ट्रीय एकता और अखण्डता की ज्वलंत मिसाल थे।स्वामी श्रद्धानन्द ने विश्व बंधुत्व का जो संदेश हम सबको दिया तथा नैतिकता का पाठ पढ़ाया वह केवल भारत के पास है,पूरे विश्व मे ओर कहीं नहीं मिलेगा। उन्होंने दलितों उद्धार के सराहनीय कार्य किया I
आर्य नेता ओम सपड़ा (प्रधान, उत्तरी दिल्ली वेद प्रचार मण्डल) ने अध्यक्षीय उद्बोधन में बताया की हमें जो विचार महर्षि दयानन्द ओर स्वामी श्रद्धानन्द जी ने दिए हैं उसे आज जीवन में लागू करने की आवश्यकता है,उनके जन्मोत्सव पर उन्हें याद करने का अर्थ है सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना आपसी भाई चारे से समाज व देश को मजबूत बनाएं, तभी महापुरुषों का जन्मोत्सव मनाना सार्थक हो सकती है।स्वामी श्रद्धानन्द जी ने गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को पुनः जीवित किया व समान शिक्षा पद्धति को बढ़ावा दिया यही उनकी कथनी और करनी की समानता का प्रेरक उदाहरण है।उन्होंने कहा कि आज फिर से शुद्धि आंदोलन चलाने की आवश्यकता है जिससे जो लोग किसी कारण से विधर्मी हो गए थे उन्हें वापिस हिन्दू धर्म मे लाया जा सके।स्वामी श्रद्धानन्द ने शुद्धि आंदोलन की शुरुआत की ओर घर वापसी का मार्ग प्रशस्त किया।
गायिका प्रवीन आर्या, बिमला आहूजा,सतीश शास्त्री,प्रवीण आर्य (गाजियाबाद), कृष्णा गांधी, राज अरोड़ा ने अपने गीतों से समा बांध दिया।

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आर्य नेता प्रेम सचदेवा (प्रधान,आर्य समाज अशोक विहार) ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी श्रद्धानन्द स्वामी दयानन्द के ऐसे शिष्य थे जिन्होंने ऋषियों की परम्पराओं का पालन करते हुऐ गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना हरिद्वार में की। मंत्री जीवन लाल आर्य ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद कहते थे यदि आपकी परमपिता परमात्मा में पूर्ण श्रद्धा है तो भगवान आपके सारे कार्य पूर्ण करेंगे।

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इस अवसर पर मुख्य रूप से सर्वश्री वीरेंद्र आहूजा, डीके भगत,आशा भटनागर, विजय अरोड़ा, सुधीर सक्सेना,किरण आनन्द, कांता भाटिया,राज तनेजा, कुसुम भण्डारी,आर के भण्डारी,प्रतिभा सपड़ा, डिम्पल भंडारी,पुष्पा सक्सेना, सीमा ढींगरा, देवेन्द्र श्रीधर, रामकुमार आर्य, सोनिया संजू ,अनिता, सत्यपाल गांधी आदि उपस्थित रहे।

शांतिपाठ एवं ऋषि लंगर के साथ समारोह संपन्न हुआ।

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