लोक नाट्यहिल-जात्रा व हिरन चित्तलसंस्कृति अंक-आलेख व छायाकार -बृजमोहन जोशी नैनीताल! दिनांक २४-०८-२०२६


लोक नाट्य जन साधारण का मंच है। इसका मुख्य उद्देश्य तो मनोरंजन ही होता है,परन्तु साधारणतया व ह्रदय को छू लेने वाले कथानक के साथ यह सामाजिक विसंगतियों व कुरीतियों पर भी करारा व्यंग करते हैं। कुमाऊंनी लोक नाट्य विधा के अन्तर्गत ” हिल जात्रा “और “हिरन चित्तल” को रखा गया है।लोक नाट्य शिक्षा प्रद होते हैं और सुधार का पुट लिए रहते हैं।
हिल जात्रा हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। किसानी संस्कृति भारत का अभिन्न अंग रही है। यहां हिल का अर्थ पहाड़ से नहीं है यहां हिल का अर्थ है किचड़ से और जात्रा का अर्थ है यात्रा अर्थात” किचड़ में यात्रा”! अर्थात इस समय खेतों में पानी भरा हुआ है ,और पानी से भरे खेतों में बैलों के द्वारा जुताई करके खेत को तैयार किया जा रहा है।
उत्तराखंड – कुमाऊं मण्डल के सीमावर्ती क्षेत्र “सोर ” में वर्षा ऋतु के आगमन पर मनाया जाने वाला लोकोत्सव‌ हैं हिल जात्रा। हिल जात्रा किसानी संस्कृति का प्रतीक है।लोक उत्सव है।जिसमें बैलों के प्रति किसानों के प्रति सम्मान का भाव प्रकट किया जाता है।और साथ ही साथ जो हमारे इष्ट देवता हैं भूमिया हैं,शंकर के गण ” वीर भद्र” लखिया भूत उनके प्रति भी आदर का भाव पूजा, का भाव निवेदित किया जाता है।
कुरमौड़ के नाम से यह जगह प्रसिद्ध है।माना जाता है कि पिथौरागढ़ के कुमौड़ के मूल पुरुष कुरमौड़ थे उन्हीं के नाम पर यह कुमौड़ ग्राम है। सबसे पहले इस स्थान पर खेती बाड़ी ही सबसे मुख्य आधार था।‌आज भी यहां पर पुराना कोट( किला) है। इसके सबसे निचले तल पर जानवर रहते थे। दुमंजिले में स्त्री पुरुष रहते थे और इसके चारों ओर हर जगह खेती होती थी। किसान खेती करते थे। यहां के वीर पुरूषों के बारे में यह माना जाता है कि उन्होंने खेती को मुख्य आधार बनाया।पशु पालन को मुख्य आधार बनाया। और पूरे समाज को अपने साथ जोड़ा।इन महर लोगों ने उस समय जितनी भी जातियां थीं उस समय उन्हें अपने साथ जोड़ा। और यह महर लोग एक राजसी प्रतापी कौम के रूप में यहां उभरी,और इनके मूल पुरुष के नाम पर यह जगह प्रसिद्ध हुई। उन्हीं को याद करते हुए शिव के गण वीर भद्र (लखिया भूत) को याद किया जाता है। और खेती के प्रति सम्मान निवेदित किया जाता है। लोगों को यह बतलाता जाता है कि हिल जात्रा का सन्देश घर घर जन-जन तक पहुंचे। और इस अंचल के लोग खेती से पशुपालन से जुड़ें और इसको न छोड़ें।जैसा कि कहा भी गया है कि –
उत्तम खेती मध्यम वान,
निकृष्ट चाकरी भीख निदान।
कहा गया है कि खेती तो उत्तम ही है हिल जात्रा उससे जुड़ने का संदेश भी है।
कुमाऊंनी लोक नाट्यों के रूप में हिल जात्रा,हिरन चित्तल को लिया गया है। हिरन चित्तल भादौ माह की अष्टमी के आस पास कुमाऊं के सीरा क्षेत्र की अस्कोट पट्टी में यह लोक उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसमें रंग बिरंगे कपड़ों से सजाकर,सिंगों से युक्त हिरन का मुखौटा पहनकर लोग” हिरन चित्तल “अर्थात चितकबरा हिरन विभिन्न भाव भंगिमाओं में नृत्य करते हैं।इस उत्सव में लोक देवता ” बालचिन” ग्वाला बनकर चवंर गाय की पूंछ से ” हिरन चित्तल” को झाड़ता फूंकता नृत्य करता है। अभिनय की प्रधानता के कारण इसे लोक नाट्य में शामिल किया गया है।