विश्व मधुमक्खी दिवस विशेष

तीन फीट तीन मील का नियम मधुमक्खी पालन का एक सिद्धांत है जो छत्ते को स्थानांतरित करने के तरीके को निर्धारित करता है जिससे छत्ते हेतु चारा खोजने वाली मधुमक्खियों को नुकसान न पहुंचे । छत्ते को बहुत कम दूरी (एक बार में 3 फीट से कम) या बहुत अधिक दूरी (3 मील से अधिक दूर) तक ले जाना ।
20 मई को विश्व स्तर पर ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता में मधुमक्खियों और अन्य परागण कर्ताओं की भूमिका के बारे में जागरूकता फैलाना है । मधुमक्खियां दुनिया की लगभग एक-तिहाई फसलों और 90% जंगली फूलों के पौधों को परागित करती हैं, जो हमारे फल, सब्जियों और अनाज का मुख्य आधार हैं।।यह दिवस आधुनिक मधुमक्खी पालन के अग्रणी ‘एंटोन जानसा’ के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिनका जन्म 20 मई 1734 को स्लोवेनिया में हुआ था।
एक मधुमक्खी छत्ते से एक बार में 50 से 100 फूलों का दौरा करती है। 1 पौंड शहद बनाने के लिए 20 लाख फूलों का दौरा करना पड़ता है! एक औसत श्रमिक मधुमक्खी अपने जीवनकाल में केवल लगभग 1/12 चम्मच शहद ही बना पाती है। मधुमक्खी जन्म से शहद बनाना नहीं जानती; युवा मधुमक्खियों को अनुभवी मधुमक्खियाँ सिखाती हैं।
मधुमक्खियाँ पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण जीवों में से एक हैं। ये न केवल शहद बनाती हैं, बल्कि कृषि और पौधों के परागण का 30% से अधिक हिस्सा भी संभालती हैं। मधुमक्खियाँ एक विशेष प्रकार के नृत्य के माध्यम से एक-दूसरे से बात करती हैं और भोजन की दिशा और दूरी बताती हैं। इनकी पाँच आँखें होती हैं— दो बड़ी आँखें (आकृतियों के लिए) और तीन छोटी आँखें (रोशनी के लिए)।केवल मादा मधुमक्खियाँ ही डंक मार सकती हैं, नर मधुमक्खियों में डंक नहीं होता। एक पाउंड (लगभग 450 ग्राम) शहद बनाने के लिए मधुमक्खियों को 20 लाख फूलों तक जाना पड़ता है और 55,000 मील से अधिक की दूरी उड़नी पड़ती है।विश्व की कृषि का एक बड़ा हिस्सा मधुमक्खियों पर निर्भर है। ये फसलों और फूलों के परागण में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं। वैज्ञानिकों द्वारा इन्हें हमारी धरती का सबसे मूल्यवान जीवित प्राणी माना गया है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के समर्थन के बाद, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2017 में 20 मई को आधिकारिक तौर पर ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ घोषित किया था। पहली बार यह दिवस 20 मई 2018 को मनाया गया था।मधुमक्खियों के संरक्षण की आवश्यकता आज के समय में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के कारण मधुमक्खियों की आबादी तेज़ी से घट रही है। । मधुमक्खी को भारतीय परंपरा और पौराणिक कथाओं में ‘भ्रमरी देवी’ का रूप माना जाता है। मधुमक्खियों के हमले से बचने. भ्रमरी देवी मंत्र :”ॐ ह्रीं भ्रमरी देव्यै नमः” का जाप किया जाता है । प्राचीन गरुड़ पुराण में डंक के प्रभाव को कम करने के लिए ॐ नमः वासुदेवाय नमः मंत्र का उल्लेख है। प्राणीमात्र में मधुमक्खी द्वारा बनाए गए मधु का वास हो ललित तिवारी

यह भी पढ़ें 👉  ज्ञान ज्योति ट्रस्ट के सौजन्य से विद्यालयों में कॉपियां वितरण की गई

Advertisement
Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad