जीवन में समग्र पोषण की भूमिका” गोष्ठी संपन्न स्वस्थ समाज व राष्ट्र के लिए समग्र पोषण आवश्यक है-प्रो. करूणा चांदना

नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “जीवन में समग्र पोषण की भूमिका” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह करोना काल से 567 वा वेबिनार था।

मुख्य वक्ता प्रो. करूणा चांदना ने कहा कि सितंबर माह सही पोषण के लिए अनिवार्य है माननीय मोदी जी ने 2018 में समग्र पोषण अभियान के लिए व्यापक योजना शुरू की थी ताकि बच्चों गर्भवती महिलाओं, स्तनपान करने माता और किशोरियों की जो बढ़ती हुई कुपोषण और एनीमिया की समस्या है उसकी और जागरूकता बढ़े । तेज गति के इस युग में लोग स्वास्थ्य और पोषण को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं इसके साथ ही सेडेंट्री लाइफस्टाइल जीने लगे हैं। प्रोसैस्ड, जंक, डिब्बा बंदी खाना खाने लगे हैं जिससे शरीर में रसायन कीटनाशक विषैला तत्व घुसने शुरू हो गए हैं जिससे शरीर बीमारियों का शिकार होने लगा है।
इस समस्या से निदान पाने के लिए समग्र पोषण बहुत ही उपयोगी विकल्प है समग्र पोषण से अभिप्राय न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक, संवेगात्मक, आध्यात्मिक दृष्टि से पोषण लेना अर्थात सात्विक जीवन शैली तथा सात्विक भोजन अपनाना है। पोषण का आधार भोजन में सभी खाद्य वर्ग जैसे साबुत अनाज दालें प्लांट बेस्ड फल और सब्जियां सही प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा हेल्दी फैट्स शामिल करना है इसके अलावा सचेत भोजन,उचित पेय पदार्थों का सेवन,प्राकृतिक खाना जो कि कृत्रिम योजक योजक कृत्रिम परिरशक , तथा तथा विषैला पदार्थ से रहित हो क्योंकि ऐसा खाना खाने से ही निश्चित रूप से व्यक्ति की भूख शांत होती है और किसी वजह से गलत खान-पान से अगर शरीर में कोई कमी भी आ जाए तो शरीर अपनी जन्मजात क्षमता से स्वयं ही हील कर लेता है यानी बॉडी सेल्फ रिस्टोर, रीजेनरेट, री बैलेंस कर लेती है।
समग्र पोषण शरीर दिमाग को पोषण देने का व्यापक दृष्टिकोण है यह बॉडी ,माइंड तथा आत्मा के अतः संबंध पर जोड़ देता है अनुसार व्यक्ति के अस्तित्व के सभी पहलू घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं मानसिक स्वास्थ्य और समग्र पोषण का गहरा संबंध है व्यक्ति अगर समग्र पोषण के साथ व्यायाम योग ध्यान प्राणायाम करता है तो उसका मानसिक तनाव कम होता है स्थिर मनोदशा होती है व्यक्ति समृद्ध खुशहाल स्वस्थ जीवन जीता है उसकी सहनशक्ति बढ़ती है स्टेमिना बढ़ता है ऊर्जा, उमंग, उत्साह जीवन शक्ति बढ़ती है।वैदिक शैली
के अनुसार समग्र पोषण न केवल अंग प्रत्यंग को पोषित और संतुलित करता है बल्कि लंबे समय तक समग्र पोषण करने से स्वस्थ दिमाग स्वस्थ आत्मा होने लगती है जिससे रोग स्वयं ही उलट जाते हैं और व्यक्ति जब स्वयं को हर दृष्टि से स्वस्थ पता है तो वह स्वस्थ समाज, स्वस्थ राज्य और स्वस्थ राष्ट्र की प्रगति में अपनी भागीदारी देना शुरू कर देता है।
मुख्य अतिथि अनिता रेलन व डॉ. कल्पना रस्तोगी ने भी जीवन शैली, आहार विहार पर प्रकाश डाला।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया और प्रवीण आर्य ने धन्यवाद् ज्ञापित किया।

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गायिका प्रवीणा ठक्कर, रविन्द्र गुप्ता, ईश्वर देवी, कमला हंस,जनक अरोड़ा, प्रतिभा कटारिया, कुसुम भण्डारी ऊषा सूद आदि ने भजन प्रस्तुत किए।