कुविवि में हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को होगा मंथन
केंद्रीय रक्षा एवं राज्य पर्यटन मंत्री अजय भट्ट होंगे मुख्य अतिथि
-कुविवि के वाणिज्य विभाग की ओर से 9-10 अक्टूबर को कराया जाएगा कार्यक्रम
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नैनीताल। कुमाऊं विवि में हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं के संबंध में मंथन को लेकर एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। कुलाधिपति राज्यपाल (सेनि) लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की प्रेरणा पर विवि के वाणिज्य विभाग की ओर से 9 तथा 10 अक्टूबर को प्रस्तावित इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय रक्षा एवं राज्य पर्यटन मंत्री अजय भट्ट शामिल होंगे।
कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर रविवार को वाणिज्य विभाग में बैठक आयोजित की गई। इस दौरान आयोजन की रूपरेखा तय की गई। वाणिज्य विभाग के संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. अतुल जोशी की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि ‘भारतीय हिमालयी क्षेत्र में होम स्टे पर्यटन और सतत विकास: संभावनाएं एवं चुनौतियां’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में कई अहम बिंदुओं पर विचार विमर्श से किया जाएगा। सेमिनार में मंथन के बाद संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। सुझावों के आधार पर सरकार की ओर से पर्यटन के क्षेत्र में बेहतर आयाम स्थापित किया जा सकेंगे। उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम पूर्व में विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर 27 सितंबर को प्रस्तावित था। लेकिन इस अवधि में स्थानीय लोगों की आस्था का प्रतीक मां नंदा-सुनंदा महोत्सव भी प्रस्तावित है। महोत्सव की आयोजक संस्था की ओर से घोषित किए गए कार्यक्रम के अनुसार 27 सितंबर को नंदा महोत्सव के डोले का नगर भ्रमण रखा गया है। ऐसे में यातायात समेत अन्य व्यवस्थाएं प्रभावित न हों, इसके लिए कार्यक्रम को 9 तथा 10 अक्टूबर को कराए जाने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम में प्रख्यात पर्यावरणविद् एचएनबी यूनिवर्सिटी गढ़वाल के पूर्व कुलपति प्रो. एससी बागरी मुख्य वक्ता होंगे। जबकि विभिन्न स्थानों से विषय विशेषज्ञ भी हिस्सा लेंगे। संगोष्ठी में शोधार्थी एवं शोधकर्ताओं की ओर से शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही पुस्तक विमोचन का भी कार्यक्रम रखा गया है। इस मौके पर डॉ. आरती पंत, डॉ. विजय कुमार, डॉ. ममता जोशी, डॉ. निधि वर्मा, डॉ. हिमानी जलाल, डॉ. मनोज पांडे, डॉ. जीवन उपाध्याय, अंकिता आर्या, डॉ. तेज प्रकाश, डॉ. पूजा जोशी पालीवाल, डॉ. विनोद जोशी, रीतिशा शर्मा, सुबिया नाज आदि मौजूद रहे।









