शिया समुदाय के लोगों ने मुहर्रम पर निकाला मातमी जुलूस

नैनीताल l मोहर्रम पर शिया समुदाय के लोगों ने हरी नगर से मोटा पानी तक मातमी जुलूस निकाला l बता दें कि आशूरे के दिन यानी 10 मुहर्रम को एक ऐसी घटना हुई थी, जिसका विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। इराक स्थित कर्बला में हुई यह घटना दरअसल सत्य के लिए जान न्योछावर कर देने की जिंदा मिसाल है। कारगिल से आए मौलाना सज्जाद हुसैन वह जौनपुर से आए मौलाना कुमेल अब्बास ने मजलिस को खिताब फरमाया और उन्होंने बताया इस घटना में हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के नवासे (नाती) हजरत हुसैन को यज़िद ने शहीद कर दिया गया था। मोहर्रम बच्चों, महिलाओं सहित लोगों पर ढाए गए जुल्म व सितम की कभी न भूली जाने वाली दर्द भरी दास्तां है. इस दिन हजरत इमाम हुसैन सहित उनके मासूब बेटे और साथियों को शहीद कर दिया गया था. इस्लामिक साल का पहला महीना मोहर्रम शहादत का महीना माना जाता है किसी शायर ने खूब ही कहा है- कत्ले हुसैन असल में मरग-ए-यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद !कर्बला की जंग सिर्फ जुल्म के खिलाफ थी. कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की शहादत ने पूरी दुनिया में इस्लाम का बोलबाला कर दिया. मोहर्रम इस्लामिक साल का पहला महीना कहलाता है. मुस्लिम मजहब में मुहर्रम का बहुत ही अहम है. पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत में मुहर्रम मनाया जाता है. इसमें शिया समुदाय के लोग इमाम हुसैन की शहादत को याद कर शोक मनाते हैं. दरअसल, इस दिन को इस्लामिक कल्चर में मातम का दिन भी कहा जाता है. क्योंकि नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन अपने 72 साथियों और परिवार के साथ मजहब-ए-इस्लाम को बचाने, हक और इंसाफ को जिंदा रखने के लिए शहीद हो गए थे. तभी से मुहर्रम मनाया जाने लगा. 10वें दिन रोज-ए-आशुरा मनाया जाता है जाता है.

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जब इमाम हुसैन ने पीया शहादत का जाम: जो जुल्म और सितम यजीद और उसके साथियों ने पैगंबर मोहम्मद के खानदान पर किए, उसे शायद ही कोई भूल सकता है. कर्बला में शहीद नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन के कटे हुए सर की तिलावात को देखकर लोग हैरान रह गए. जब यजीदियों ने इमाम हुसैन के बेटे नन्हे अली असगर (6 माह) को भी नहीं छोड़ा, उसे भी तीरों से छलनी-छलनी कर दिया. मुहर्रम का पूरा महीना खानदाने रसूल की शहादत की बहुत याद दिलाता है. दरअसल बादशाह यजीद ने अपनी सत्ता कायम करने के लिए हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार को बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया था.

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मुहर्रम में क्या करते हैं?: मुहर्रम इस्लाम धर्म के लोगों का बहुत अहम है. पैगंबर मुहम्मद साहब के नाती की शहादत तथा करबला के शहीदों की शहादत को याद किया जाता है. कर्बला के शहीदों ने इस्लाम मजहब को नया जीवन प्रदान किया था.
29 जुलाई 2023 को हरी नगर स्थित अफजल खान के घर से एक माध्यमिक जुलूस मोटर पानी स्थित इमामबाड़े में संपन्न हुआ जिसमें सदर ए आर खान, मंजूर हुसैन, फरमान खान, सरवर अली खान, गुलाम अली, रजब अली, रमजानी खान, अमजद खान, मुस्ताक खान, महमूद अली, खालिद आदी शामिल रहे l इस दौरान थानाध्यक्ष रोहिताश सिंह सागर समेत अनेक पुलिसकर्मी सुरक्षा की दृष्टि से शामिल रहे l

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